पलनवा गढ़ दे रे बढ़ईया झूला झूलेगो ललनवा

पलनवा गढ़ दे रे बढ़ईया झूला झूलेगो ललनवा


पलनवा गढ़ दे रे बढ़ईया,
झूला झूलेगो ललनवा।

नाजुक-नाजुक मेरो ललनवा,
सुंदर सा गढ़ देवो पलनवा।
चंदन का लेयो लकड़वा,
झूला झूलेगो ललनवा।

रेशम का बनायो रसरवा,
चांदी का लगायो घुंघरवा।
मखमल लेयो गद्दनवा,
झूला झूलेगो ललनवा।

बाजे ढोल, गाए हैं गीतनवा,
यशोदा के मुसकाए ललनवा।
सखियन के बोले पैंजनवा,
झूला झूलेगो ललनवा।

ऐसो सुंदर बन्यो है पलनवा,
नंद बाबा के भा गयो मनवा।
खुश हो के लुटाए खजिनवा,
झूला झूलेगो ललनवा।


Jhoola jhoolega lalanva Krishan Bhajan Singer and Writer Kumar Shravan

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Singer: Kumar Shravan
Corus. Shreya, Anshika,
Benjo: Munna
Tabla: Lenin John

नन्हा कृष्ण पालने में झूल रहा है, और बढ़ई से उसके लिए सुंदर पालना तैयार करने को कहा जा रहा है। उनका नाजुक, सुंदर रूप इतना मनमोहक है कि पालना भी वैसा ही बनाया जाए। चंदन की लकड़ी से बना पालना, रेशम की रस्सियों और चाँदी के घुँघरुओं से सजा हो, मखमल का गद्दा उसकी शोभा बढ़ाए।

ढोल की थाप और गीतों की मधुर धुन के बीच यशोदा का लाल मुस्कुराता है। सखियाँ उनके पायल की झंकार के साथ उत्साह में हैं। यह पालना इतना सुंदर है कि नंद बाबा का मन प्रसन्न हो उठता है, और वे खुशी में खजाना लुटाने को तैयार हैं। यह भजन कृष्ण के बाल स्वरूप की मधुरता और उनके झूले की रौनक को चित्रित करता है, जो भक्ति और प्रेम से हर मन को आनंदित करता है।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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