डुब्बदी बेड़ी नू पार ला दिओ जी भजन

डुब्बदी बेड़ी नू पार ला दिओ जी भजन

 
डुब्बदी बेड़ी नू पार ला दिओ जी

जो भी तेरे दर ते आए,
सभना आ पल्ले विछाए,
निमाणा जो बन के आया,
ख़ाली ना एथों जाए।
सभना दी आस पुगा दियो जी,
डुबदी बेड़ी नू पार ला दियो जी,
बाबा जी साड़ी,
डुबदी बेड़ी नू पार ला दियो जी।।

तुआड़ी महिमा है न्यारी, ताहिओं दूरों चल आए,
कई सुक्केआं रुख़्खां नू बाबा जी ने फल लाए,
साड़ा होर नहींओं कोई, जेहड़ा देवे सानूं ढोई,
दर छड्डणा नी तेरा, मनलवो अरजोरी,
निमाणियां दा मान वधा दियो जी,
डुबदी बेड़ी नू पार ला दियो जी,
बाबा जी साड़ी,
डुबदी बेड़ी नू पार ला दियो जी।।

गुरु नानक प्यारे, सानूं तेरे ही सहारे,
तुस्सी बख्शणहारे, असीं दर दे मुखाठ,
ख़ैर सभना दी झोली आज पा दियो जी,
डुबदी बेड़ी नू पार ला दियो जी,
बाबा जी साड़ी,
डुबदी बेड़ी नू पार ला दियो जी।।

तेरे नाम नू ध्याईए, दिने रात जस गाईए,
बोल तेरे वडिआईए, एहो मिले सानूं दात,
निगाह आपणियां दासां ते वी पा दियो जी,
डुबदी बेड़ी नू पार ला दियो जी,
बाबा जी साड़ी,
डुबदी बेड़ी नू पार ला दियो जी।।
जो भी तेरे दर ते आए।।


Dubdi Bedi Nu Paar La Do Ji - Miri Piri Khalsa Jagadhari Wale - Khalsaji

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जो भी सच्चे मन से बाबा जी के दरबार में आता है, उसे खाली हाथ नहीं लौटना पड़ता। निमाणा बनकर, सब कुछ छोड़कर आने वाले की हर आस पूरी हो जाती है। डूबती नाव को वे पार लगा देते हैं, जैसे कोई प्यारा हाथ पकड़कर किनारे तक ले आए। दूर-दूर से लोग चलकर आते हैं क्योंकि उनकी महिमा निराली है। सूखे पेड़ों को भी फल लगवा देते हैं, और जिनके पास कोई सहारा नहीं होता, उन्हें वे खुद थाम लेते हैं।

गुरु नानक देव जी के प्यारे बाबा जी, हम सब उनके ही सहारे हैं। वे बख्शने वाले हैं, हम तो बस उनके दर के भिखारी हैं। झोली में खैर भर देते हैं, निगाह अपनी दासों पर रख लेते हैं। दिन-रात उनका नाम जपते हैं, उनकी वड़ियाई गाते हैं, बस यही दात मिल जाए कि वे हमारी छोटी-छोटी अरजों को सुन लें।

जब बाबा जी का नाम लेते हो तो मन में एक अटूट भरोसा जाग जाता है। जीवन की किसी भी मुश्किल में, चाहे नाव कितनी ही डूबती क्यों न हो, वे पार लगा ही देते हैं। निमाणे का मान बढ़ा देते हैं, और जो कुछ भी माँगो, प्रेम से दे देते हैं। उनके दरबार में आकर दिल को सुकून मिलता है, जैसे घर आ गए हों।

आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री बाबा बालक नाथ जी की।
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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