हर देश में तू हर भेष में तू तेरे नाम अनेक तू
हर देश में तू हर भेष में तू तेरे नाम अनेक तू
हर देश में तू, हर भेष में तू
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है,
तेरी रंग भूमि यह विश्व धरा,
सब खेल में तू, हर मेल तू,
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है।।
सागर से उठा, बादल बन के,
बादल से गिरा जल हो करके,
फिर नहर बना, नदियाँ गहरी,
तेरे भिन्न प्रकार, तू एक ही है।
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है।।
चोटी, अणु, परमाणु बना,
सब जीव जगत का रूप लिया,
कहीं पर्वत, वृक्ष, विशाल बना,
सौन्दर्य तेरा, सब ही है।
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है।।
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है,
तेरी रंग भूमि यह विश्व धरा,
सब खेल में तू, हर मेल तू,
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है।।
सागर से उठा, बादल बन के,
बादल से गिरा जल हो करके,
फिर नहर बना, नदियाँ गहरी,
तेरे भिन्न प्रकार, तू एक ही है।
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है।।
चोटी, अणु, परमाणु बना,
सब जीव जगत का रूप लिया,
कहीं पर्वत, वृक्ष, विशाल बना,
सौन्दर्य तेरा, सब ही है।
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है।।
har desh me tu har vesh me tu by P P sant shri krishna chandra shastri ji thakur ji 1
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Admin - Saroj Jangir
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