रे मन मस्त सदा दिल रहना
रे मन मस्त सदा दिल रहना
रे मन मस्त सदा दिल रहना,
आन पड़े सो सहना।
रे मन मस्त सदा दिल रहना।।
कोई दिन कम्बल, कोई दिन अंबर,
कबहुं दिगंबर सोना,
आत्म नशे में देह भुलाकर,
साक्षी होकर रहना।
रे मन मस्त सदा दिल रहना।।
कड़वा मीठा सबका सुनना,
मुख अमृत बरसाना,
समझ सुखदुख नभबादल सम,
रंग~संग छुड़ाना।
रे मन मस्त सदा दिल रहना।।
आन पड़े सो सहना।
रे मन मस्त सदा दिल रहना।।
कोई दिन कम्बल, कोई दिन अंबर,
कबहुं दिगंबर सोना,
आत्म नशे में देह भुलाकर,
साक्षी होकर रहना।
रे मन मस्त सदा दिल रहना।।
कड़वा मीठा सबका सुनना,
मुख अमृत बरसाना,
समझ सुखदुख नभबादल सम,
रंग~संग छुड़ाना।
रे मन मस्त सदा दिल रहना।।
Re Man Mast Sada Dil Rehna | Bhajan | New Composition
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Admin - Saroj Jangir
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