कृष्ण एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे। उनमें जीवन के समस्त आयामों का समावेश था। वे एक वीर योद्धा, एक कुशल राजनीतिज्ञ, एक ज्ञानी दार्शनिक, एक प्रेमी, एक खिलाड़ी, और एक कलाकार थे। कृष्ण का व्यक्तित्व इंद्रधनुष के सातों रंगों की तरह था। इंद्रधनुष में सातों रंगों का समावेश होता है, जो सभी अलग-अलग हैं, लेकिन एक साथ आकर एक सुंदर दृश्य का निर्माण करते हैं। इसी तरह, कृष्ण के व्यक्तित्व में भी सभी प्रकार के गुणों का समावेश था, जो एक साथ आकर एक अद्भुत व्यक्तित्व का निर्माण करते थे। कृष्ण के व्यक्तित्व में परस्पर विरोधी अंशों का भी स्वीकार था।
कन्हैया हर घड़ी मुझको तुम्हारी याद आती है
कन्हैया हर घड़ी मुझको, तुम्हारी याद आती है, मुझे मोहन रुलाती है, तुम्हारी याद आती है, मुझे मोहन रुलाती है, तुम्हारी याद आती है।
तुम्हारी याद में मोहन, ना हमको नींद आती है, ये दुनिया की चमक प्यारे, हमें भी ना सुहाती है, मेरे दिल से मेरे मोहन, सदा इतनी सी आती है, कन्हैया की हूँ मैं जोगन, मुझे इतना बताती है, तुझे हरदम बुलाती है, तुम्हारी याद आती है, मुझे मोहन रुलाती है, तुम्हारी याद आती है।
जो कुछ भी था दिया तुमने,
New Bhajan 2023 Lyrics in Hindi
वही तुमको चढ़ाते है, है मेरी आँख में आंसू, यही तुमको दिखाते है, भगत की आँख में आंसू, ना मोहन देख पाते है, तेरी उल्फत के बिंदु है, यही तुमको बताते है, मुझे हरदम जलाती है, तुम्हारी याद आती है, मुझे मोहन रुलाती है, तुम्हारी याद आती है।
दया कर दो मेरे मोहन, तुम्ही दाता कहाते हो,
नैनों में नीर है मेरे, मुझे तुम क्यूँ रुलाते हो, चले आओ मेरे मोहन, तड़प अब सह ना पाई है, मेरे जीवन की सांसो ने, तुम्हारी महिमा गाई है, यश को दर खिंच लाती है, तुम्हारी याद आती है, मुझे मोहन रुलाती है, तुम्हारी याद आती है।
कन्हैया हर घड़ी मुझको, तुम्हारी याद आती है, मुझे मोहन रुलाती है, तुम्हारी याद आती है, मुझे मोहन रुलाती है, तुम्हारी याद आती है
कन्हैया हर घडी मुझको तुम्हारी याद आती है || Vimal Dixit Pagal || Devotional Krishna Bhajan 2022
कृष्ण के भक्तों ने भी उन्हें अलग-अलग रूपों में स्वीकार किया है। सूरदास ने कृष्ण को एक बालक के रूप में चित्रित किया है, जो अपनी प्रेम और रासलीलाओं के लिए प्रसिद्ध हैं। गांधी जी ने कृष्ण को एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में देखा, जिनके दर्शन ने उन्हें अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। शंकराचार्य ने कृष्ण को एक दार्शनिक के रूप में देखा, जिन्होंने जगत की मायावादी प्रकृति का प्रतिपादन किया। रामानुज ने कृष्ण को एक भक्त के रूप में देखा, जिन्होंने भक्ति के मार्ग को सर्वोच्च बताया।