की हरे रामा रिमझिम बरसे पनिया झूले राधा

की हरे रामा रिमझिम बरसे पनिया झूले राधा


की हरे रामा रिमझिम
बरसे पनिया
झूले राधा रानिया हरी

घिर आइल घुँघर घनकरे
परे रिमझिम बूंद फुहारे
हरे रामा चमक रही दमिनिया
झूले राधा रानिया हरी

की झूमे गर सोहे मोतियन माला
अंग अंग में भूषण निराला
हरे रामा कमर पड़ी करधानिया
झूले राधा रानिया हरी

की झूमे उ झूले सुमन हिंडोला
बिन दाम लेत मनमोला
हरे रामा मंद मंद मुस्कनिया
झूले राधा रानिया हरी

की हरे रामा रिमझिम
बरसे पनिया
झूले राधा रानिया हरी


Are Rama Rimjhim Barshe Paniya|अरे रामा रिमझिम बरषे पनिया|सावन कजरी| Sawan kajri by Singer Rupesh ch

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सुन्दर भजन में वर्षा ऋतु की रिमझिम बूंदों के बीच राधारानी का झूला झूलना मन को मोह लेने वाला दृश्य प्रस्तुत करता है। घनघोर घटाएँ छाई हैं, बिजली की चमक आकाश में नृत्य कर रही है और वातावरण रस और उमंग से भर गया है। उस पावन क्षण में राधारानी का झूला झूलना जैसे प्रकृति और प्रेम का संगम बन जाता है।

गले की मोतियों की माला, अंग-अंग के अलंकार और कमर की करधनी की मधुर झंकार राधारानी की शोभा को और दिव्य बना देते हैं। उनके प्रत्येक हावभाव में माधुर्य और अलौकिक आकर्षण झलकता है। झूले पर बैठी उनकी मंद-मंद मुस्कान मानो श्रीकृष्णजी को ही नहीं, समूचे ब्रज को रस में डुबो देती है।
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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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