જાગ્યને જાદવા કૃષ્ણ ગોવાળિયા મીનિંગ

જાગ્યને જાદવા કૃષ્ણ ગોવાળિયા લિરિક્સ મીનિંગ(રાગ - પ્રભાતિયું)

यह मधुर भजन महाकवि नरसिह मेहता द्वारा रचित है जिनकी रचानाएँ स्वंय में मानक हैं। इस भजन “જાગ્યને જાદવા” (Jagya Ne Jadava) में अज्ञान की नींद को त्याग करके ईश्वर के सुमिरण का सन्देश है। श्री कृष्ण जी के अद्भुद गुणों के बारे में जानकारी मिलती है। आइये इस भजन का अर्थ जान लेते हैं।

Jaag Ne Jadva Bhajan Meaning

જાગ્યને જાદવા કૃષ્ણ ગોવાળિયા,
તુજ વિના ધેનમાં કુણ જાશે ?
ત્રણસેં ને સાઠ ગોવાળ ટોળે મળ્યા,
વડોરે ગોવાળિયો કોણ થાશે ? જા.

દહિતણાં દૈથરાં, ઘીતણાં ઘેવરાં,
કઢિયલ દૂધ તે કુણ પીશે ?
હરિ તાર્યો હાથિયો,
કાળિનાગ નાથિયો,
ભૂમિનો ભાર તે કુણ લેશે ? જા.

જમુનાજીના તીરે ગૌધણ ચરાવતાં,
મધુરીસી મોરલી કુણ વા’શે ?
ભણે મહેતો નરસૈંયો,
તારા ગુણ ગાઇ રીઝિયે,
બૂડતાં બાંહેડી કોણ સહાશે ?
જા.

અન્ય સંસ્કરણ

જાગને જાદવા કૃષ્ણ ગોવાળિયા
તુજ વિના ધેનમાં કોણ જાશે ?
ત્રણસેં ને સાઠ ગોવાળ ટોળે વળ્યા
વડો રે ગોવાળિયો કોણ થાશે ?
… જાગને

દહીંતણા દહીંથરા ઘી તણાં ઘેબરાં
કઢિયેલ દૂધ તે કોણ પીશે ?
હરિ તાર્યો હાથિયો, કાળી નાગ નાથિયો
ભૂમિનો ભાર તે કોણ સહાશે ?
… જાગને

જમુનાજીના તીરે ગૌધણ ચારતા
મધુરીશી મોરલી કોણ વા'શે ?
ભણે મહેતો નરસૈંયો તારા ગુણ ગાઇ રીઝવે
બૂડતાં બાંવડી કોણ સહાશે ?
… જાગને

હે જાગને જાદવા કૃષ્ણ ગોવાળિયા
તુજ વિના ધેનમાં કોણ જાશે ?
હે જાગને જાદવા

દહીંતણા દહીંથરા,ઘીં તણા ઘેબરાં
કઢિયેલ દૂધ તે કોણ પીશે ?

હે જાગને જાદવા કૃષ્ણ ગોવાળિયા
તુજ વિના ધેનમાં કોણ જાશે ?
હે જાગને જાદવા

જમુનાને કાંઠડે ગૌધણ ચરાવતાં
મધુરી શી મોરલી કોણ વાહશે ?

હે જાગને જાદવા કૃષ્ણ ગોવાળિયા
તુજ વિના ધેનમાં કોણ જાશે ?
હે જાગને જાદવા

- નરસિંહ મેહતા 
 
જાગ્યને જાદવા કૃષ્ણ ગોવાળિયા, તુજ વિના ધેનમાં કુણ જાશે?
जागो और हरी के नाम का सुमिरन करो। हे श्री कृष्ण जी आपके बिना कौन गायों के झुण्ड को लेकर जाएगा। 

"જાગ્યને જાદવા કૃષ્ણ ગોવાળિયા, તુજ વિના ધેનમાં કુણ જાશે?" शब्दों का अर्थ:
જાગ્યને: જાગ્ય - उठो, जागो
ને - और
જાદવા: - कृष्णा
કૃષ્ણ ગોવાળિયા: કૃષ્ણ: भगवान कृष्ण का नाम
ગોવાળિયા: - गायें चराने वाला, गोपाल
તુજ વિના: તુજ: - तुम्हारे बिना વિના: - बिना, बिना
ધેनમાં: - गायों के झुंड में
કુણ: - कौन
જાશે: - जाएगा

ત્રણસેં ને સાઠ ગોવાળ ટોળે મળ્યા, વડોરે ગોવાળિયો કોણ થાશે?
तीन सो साथ गाय का झुण्ड है और इनकी रखवाली कौन करेगा ?

ત્રણસેં: तीन सौ
ने: यह "और" का रूप है।
સાઠ: "साठ"।
ગોવાળ: यह "गोपाल" का रूप है, जिसका अर्थ है "गाय चराने वाला"।
ટોળે: यह "टोले" का रूप है, जिसका अर्थ है "समूह"।
મળ્યા: यह "मिलना" का क्रिया रूप है, जिसका अर्थ है "इकट्ठा होना"।
વડોરે: यह "वर" और "दोरे" का रूप है, जिसका अर्थ है "वरिष्ठ" या "सबसे अच्छा"।
ગોवाળિયો: यह "गोपाल" का रूप है, जिसका अर्थ है "गाय चराने वाला"।
કોણ: यह "कौन" का रूप है, जिसका अर्थ है "कौन"।
થાશે: "होगा"।

દહિતણાં દૈથરાં, ઘીતણાં ઘેવરાં, કઢિયલ દૂધ તે કુણ પીશે?
बहुत सारा दही, घी और घेवर / मिठाई और जावणी से निकाला गया दूध कौन पीयेगा (आप जागो और आप ही इसे ग्रहण करो )


દૈથરાં -दही (dahi): दही (curd)
દૈથરાં (dai): विशाल (large)
ઘી (ghī): घी (ghee)
ઘેવરાં (ghevārā): एक प्रकार की मिठाई (a type of sweet)
કઢિયલ (kaḍhiyal): मटका (clay pot)
દૂધ (dūdh): दूध (milk)
તે (te): वह
કુણ (kuṇ): कौन (who)
પીશે (pīshe): पीएगा (future tense of पीना (pīna) - to drink)

હરિ તાર્યો હાથિયો, કાળિનાગ નાથિયો, ભૂમિનો ભાર તે કુણ લેશે?
हे श्री कृष्ण जी आपने ही गज को तारा (हाथी को मुक्त किया ) आपने ही कालिया नाग को बस में किया है। आपके अतिरिक्त इस धरा का भार कौन उठाएगा ?


હરિ તાર્યો હાથિયો:
હરિ: Lord Vishnu, one of the principal Hindu deities.
તાર્યો: This word means "saved" or "rescued".
હાથિયો: This word means "elephant".
કાળિનાગ નાથિયો:
કાળિનાગ: Kalinga, a powerful snake in Hindu mythology.
નાથિયો: This word means "master" or "lord".
ભૂમિનો ભાર તે કુણ લેશે?:
ભૂમિનો: "of the earth" or "worldly".
ભાર:  "burden" or "weight".
કુણ:  "who".
લેશે: "લેવું" (levu) - to take.

જમુનાજીના તીરે ગૌધણ ચરાવતાં, મધુરીસી મોરલી કુણ વા’શે?
यमुना जी के किनारे पर गायों के झुण्ड को चराते हुए कौन आपके अतिरिक्त मधुर मुरली बजायेगा ?

જમુનાજી: Yamuna River, a sacred river in Hinduism.
ના: belonging.
તીરે: "on the bank" or "by the shore".
ગૌધણ: herd of cows.
ચરાવતાં: to graze
મધુરીસી: "sweet" or "melodious".
મોરલી:  "flute".
 કુણ: This word means "who".
 વા’શે: to play.

ભણે મહેતો નરસૈંયો, તારા ગુણ ગાઇ રીઝિયે, બૂડતાં બાંહેડી કોણ સહાશે?
नरसिंह मेहता जी हरी के गुण गाकर उन्हें रिझाते हैं और कहते हैं की कृपा कीजिये, हम तो आप के गुण ही गाते हैं। आपके अतिरिक्त कौन है जो डूबते को बचाता है।

ભણે: to speak or to say.
મહેતો: Mehta (Writer )
નરસૈંયો: Narsinh Mehta, a renowned Gujarati poet and saint.
તારા: "you"
ગુણ: "virtues" or "good qualities".
ગાઇ- to sing.
રીઝિયે: - to please or to appease.
બૂડતાં: - to sink or to drown.
બાંહેડી: T"arm" or "sleeve".
કોણ: "who".
સહાશે:- to help or to support.


Jaag Ne Jadva | Jigardan Gadhavi @jigrra


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Song : Jaag Ne Jadva
Singer : Jigardan Gadhavi @jigrra
Lyrics : Shree Narsinh Mehta
Music : Jigardan Gadhavi

Song : Jaag Ne Jadva 
Singer : Jigardan Gadhavi ‪@jigrra‬ 
Lyrics : Shree Narsinh Mehta 
Music : Jigardan Gadhavi 
Programming & Arrangements : Jay Mavani 
Flute : Sheyansh Dave

भगवान के प्रति वह अनन्य प्रेम और समर्पण का भाव ऐसा है जो सृष्टि की हर क्रिया को उनके सान्निध्य से जोड़ता है। जब हृदय से पुकार की जाती है कि प्रभु जागें, तो यह संसार की हर छोटी-बड़ी गतिविधि में उनकी उपस्थिति की याद दिलाता है। दूध, दही, घी जैसी दैनिक वस्तुओं का आस्वादन भी उनके बिना अधूरा लगता है, और गायों को चराने, यमुना के तट पर मधुर धुन बजाने जैसी लीलाएँ उनके जागरण से ही सार्थक होती हैं। यह भाव भक्त को प्रेरित करता है कि प्रभु के बिना जीवन की हर सांस व्यर्थ है, और उनकी कृपा से ही परिवार, मित्र और समस्त जगत का कल्याण संभव है। प्रभु को वैसे ही लाड़ और व्हाल से जगाना, जैसे माँ अपने बालक को जगाती है, भक्त के हृदय में परम आनंद का संचार करता है, जो सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार की शक्ति का स्मरण कराता है।

नरसिंह मेहता (1414-1488), जिन्हें नरसी मेहता या नरसी भगत के नाम से भी जाना जाता है, गुजराती भक्ति साहित्य के आदिकवि और 15वीं सदी के महान भक्त कवि थे। जूनागढ़ (गुजरात) के तलाजा ग्राम में एक नागर ब्राह्मण परिवार में जन्मे नरसिंह मेहता ने अपने भजनों और रचनाओं के माध्यम से श्रीकृष्ण भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया। उनकी रचनाएँ, जैसे "वैष्णव जन तो तेणे कहिये", जो महात्मा गांधी का प्रिय भजन था, आज भी गुजरात और भारत में भक्ति और मानवता का प्रतीक है। बचपन में अनाथ होने के बाद, उन्होंने कठिनाइयों का सामना किया, फिर भी कृष्ण भक्ति में लीन रहे। मान्यता है कि भगवान शिव और श्रीकृष्ण ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए, जिसने उनके जीवन को भक्ति के पथ पर पूर्ण रूप से समर्पित कर दिया। वे छुआछूत के खिलाफ थे और हरिजनों के साथ कीर्तन करते थे, जिसके कारण उन्हें सामाजिक बहिष्कार भी झेलना पड़ा। उनकी रचनाएँ, जैसे सुदामा चरित, गोविंद गमन आदि, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संगम हैं। नरसिंह मेहता का "नरसिंह-मीरा-युग" गुजराती साहित्य में एक स्वतंत्र काव्यकाल के रूप में जाना जाता है, जो उनकी भक्ति और काव्य की महत्ता को दर्शाता है। 

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