मौनी अमावस्या पर स्नान का महत्व मौनी अमावस्या पर स्नान का बहुत महत्व है। प्रयागराज के संगम में स्नान करने पर पितर प्रसन्न होते हैं। इसके बाद पितरों को जल अर्पित करते हैं। ऐसा करने से पितर संतुष्ट होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा भी मिलती है। हमारे पापों से भी हमें मुक्ति मिलती है।
जल तिल से तर्पण करना पवित्र स्नान के बाद कुश, जल और काले तिल से पितरों को तर्पण देते हैं। इससे पितरों की आत्मा तृप्त होती है और उनका आशीर्वाद मिलता है।
त्रिपिंडी श्राद्ध करना यदि पितृ दोष है तो मौनी अमावस्या पर त्रिपिंडी श्राद्ध करवाना चाहिए। इससे जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।
वचन से तृप्ति करना यदि जल तर्पण या दान संभव ना हो तो अपने वचनों से पितरों को प्रसन्न करें। पवित्र नदियों के किनारे पिंडदान और श्राद्ध करने से भी पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
Religious Hindi
मौनी अमावस्या आत्म-शुद्धि और पितरों की शांति के लिए की है। इस दिन, श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, विशेषकर प्रयागराज के संगम में, जिससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। स्नान के बाद, कुश, जल और काले तिल का उपयोग करके तर्पण किया जाता है, जिससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद मिलता है। पवित्र नदियों के किनारे पिंडदान और श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। इन सभी से पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
लेखक: सरोज जांगिड़, सीकर, राजस्थान
मौनी अमावस्या व्रत कथा | Mauni Amavasya Ki Katha | Mauni Amavasya Ki Kahani |मौनी अमावस्या की कहानी
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