थाने प्रथम मनावा गणराज भजन
थाने प्रथम मनावा गणराज भजन
(मुखड़ा)
थाने प्रथम मनावा गणराज,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
(अंतरा)
सबसे पहले थाने मनावा,
लड्डूवन भोग लगावा,
कीर्तन में बाबा आन विराजो,
चरना शीश नवावा,
थारा भगत करे अरदास,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
(अंतरा)
शिव शंकर का पुत्र लाडला,
पार्वती महतारी,
एकदंत गजवदन विनायक,
मूषक की असवारी,
सारा संकट हरो जी महाराज,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
(अंतरा)
लड्डूवन मोदक भोग है प्यारा,
थारे भेट चढ़ावा,
छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन,
थारे भोग लगावा,
जीमो जीमो जी जिमावा गणराज,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
(अंतरा)
नाथ गुलाब थारी महिमा गावे,
अरजी सुनियो म्हारी,
विनय करे थारी चरण चाकरी,
विपदा टारो सारी,
थासूं विनती है बारम्बार,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
(पुनरावृत्ति)
थाने प्रथम मनावा गणराज,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
थाने प्रथम मनावा गणराज,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
(अंतरा)
सबसे पहले थाने मनावा,
लड्डूवन भोग लगावा,
कीर्तन में बाबा आन विराजो,
चरना शीश नवावा,
थारा भगत करे अरदास,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
(अंतरा)
शिव शंकर का पुत्र लाडला,
पार्वती महतारी,
एकदंत गजवदन विनायक,
मूषक की असवारी,
सारा संकट हरो जी महाराज,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
(अंतरा)
लड्डूवन मोदक भोग है प्यारा,
थारे भेट चढ़ावा,
छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन,
थारे भोग लगावा,
जीमो जीमो जी जिमावा गणराज,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
(अंतरा)
नाथ गुलाब थारी महिमा गावे,
अरजी सुनियो म्हारी,
विनय करे थारी चरण चाकरी,
विपदा टारो सारी,
थासूं विनती है बारम्बार,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
(पुनरावृत्ति)
थाने प्रथम मनावा गणराज,
काज म्हारा पूरण करियो जी,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
रिद्ध सिद्ध का भरो भंडार,
आस म्हारी पूरी करियो जी।।
थाने प्रथम मनावा गणराज काज म्हारा पूरण करियों जी श्री गुलाबनाथ जी भजन लिरिक्स विनय तमोली लक्ष्मणगढ Thane Pratham Manava Ganraj Bhajan
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गणराज के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का भाव इस भजन में झलकता है। मनुष्य का हृदय जब विश्वκαी को पुकारता है, तब वह सच्चे विश्वास के साथ गणपति की शरण में जाता है। यह विश्वास कि गणेश हर कार्य को सिद्ध करने वाले हैं, हर संकट को हरने वाले हैं, जीवन को रिद्धि-सिद्धि से परिपूर्ण करने वाले हैं, उसमें गहरा भरोसा है। जैसे कोई बालक अपनी माँ के आँचल में सुख पाता है, वैसे ही भक्त गणेश के चरणों में शांति और आशा ढूँढता है। उदाहरण के लिए, जैसे कोई यात्री थककर छाँव तलाशता है, वैसे ही मन गणपति की भक्ति में विश्राम पाता है।
भक्ति का यह भाव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को संपूर्णता देने वाला है। भोग और अर्पण—लड्डू, मोदक, छप्पन भोग—ये भौतिक प्रसाद नहीं, बल्कि मन की शुद्धता और प्रेम का प्रतीक हैं। जो सच्चे हृदय से अर्पित किया जाता है, वह गणराज तक अवश्य पहुँचता है। यह सीख है कि कार्य की सिद्धि तभी संभव है, जब मन में निःस्वार्थ भाव हो।
विपदा हो या सुख, गणेश का स्मरण हर स्थिति में बल देता है। जैसे शिव-पार्वती के लाडले पुत्र एकदंत अपने भक्तों की हर पुकार सुनते हैं, वैसे ही जीवन में विश्वास और धैर्य रखने से हर बाधा दूर होती है।
भक्ति का यह भाव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को संपूर्णता देने वाला है। भोग और अर्पण—लड्डू, मोदक, छप्पन भोग—ये भौतिक प्रसाद नहीं, बल्कि मन की शुद्धता और प्रेम का प्रतीक हैं। जो सच्चे हृदय से अर्पित किया जाता है, वह गणराज तक अवश्य पहुँचता है। यह सीख है कि कार्य की सिद्धि तभी संभव है, जब मन में निःस्वार्थ भाव हो।
विपदा हो या सुख, गणेश का स्मरण हर स्थिति में बल देता है। जैसे शिव-पार्वती के लाडले पुत्र एकदंत अपने भक्तों की हर पुकार सुनते हैं, वैसे ही जीवन में विश्वास और धैर्य रखने से हर बाधा दूर होती है।
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Author - Saroj Jangir
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