हीर वारिस शाह हिंदी में

हीर वारिस शाह हिंदी में

हीर वारिस शाह हिंदी में Heer Waris Shah in Hindi

वारिस शाह की "हीर" कहानी पंजाबी साहित्य का एक अमर किस्सा है। यह कहानी एक प्रेमी जोड़े, हीर और रांझा, की कहानी है जो सामाजिक और आर्थिक बाधाओं के बावजूद अपने प्रेम को पाने के लिए संघर्ष करते हैं। हीर, एक गरीब किसान की बेटी, एक धनी व्यापारी की बेटी, रांझा, से प्यार करती है। रांझा हीर के प्यार के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उसकी मां, जो उसे हीर के लिए उपयुक्त नहीं समझती, उसे हीर से अलग कर देती है।
 
हीर वारिस शाह पंजाबी साहित्य की एक प्रसिद्ध प्रेमकथा है। यह कथा पंजाब के दो प्रेमियों, हीर और रांझा की कहानी है। हीर एक खूबसूरत और गुणवान लड़की है, जबकि रांझा एक साहसी और निडर युवक है। दोनों के बीच गहरा प्रेम है, लेकिन उनके प्रेम में कई बाधाएं आती हैं।

हीर और रांझा का प्रेम कहानी का आरंभ हीर के जन्म से होता है। हीर का जन्म शेख मुहम्मद के घर में होता है। हीर बचपन से ही बहुत सुंदर और गुणवान थी। वह पढ़ने-लिखने में भी बहुत अच्छी थी। हीर के पिता का देहांत उसके बचपन में ही हो जाता है, जिससे वह बहुत दुखी होती है।

रांझा का जन्म भी एक गरीब परिवार में होता है। रांझा बचपन से ही बहुत साहसी और निडर था। वह तलवारबाजी में बहुत माहिर था। रांझा के पिता का देहांत भी उसके बचपन में ही हो जाता है, जिससे वह बहुत दुखी होता है।

हीर और रांझा के बीच प्रेम की शुरुआत तब होती है, जब वे एक दूसरे को पहली बार देखते हैं। दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो जाते हैं। वे एक दूसरे से मिलने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं।

हीर और रांझा का प्रेम उनके परिवारों को स्वीकार नहीं है। हीर के पिता चाहते हैं कि हीर किसी अमीर और प्रतिष्ठित परिवार के लड़के से शादी करे। रांझा के पिता भी चाहते हैं कि रांझा किसी अमीर और सुंदर लड़की से शादी करे।

हीर और रांझा के प्रेम में कई बाधाएं आती हैं। हीर के पिता उसे रांझा से दूर करने के लिए उसे किसी दूसरे लड़के से शादी करने के लिए मजबूर करते हैं। रांझा भी कई बार हीर से मिलने के लिए कोशिश करता है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिलती है।

हीर और रांझा के प्रेम को अंत में सफलता मिलती है। दोनों एक दूसरे से शादी कर लेते हैं। लेकिन हीर और रांझा का सुखी जीवन ज्यादा दिन नहीं चल पाता है। रांझा की हत्या कर दी जाती है। हीर रांझा की मृत्यु से इतनी दुखी होती है कि वह भी आत्महत्या कर लेती है।

हीर वारिस शाह एक प्रेमकथा है, लेकिन इसमें सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं का भी चित्रण किया गया है। यह कथा प्रेम की शक्ति और बाधाओं का भी वर्णन करती है। हीर वारिस शाह पंजाबी साहित्य की एक अमर कृति है। 

हीर की रचना

वारिस शाह से पहले भी कई कवियों ने हीर-रांझा की कहानी का वर्णन किया था। लेकिन वारिस शाह की हीर सबसे अधिक लोकप्रिय हुई। वारिस शाह ने हीर-रांझा की कहानी को सूफियाना रंग दिया और इसमें ईश्वर के प्रेम का संदेश दिया। वारिस शाह ने हीर की रचना 1767 ईस्वी में की थी। उस समय वह कसूर के एक मदरसे में इमाम थे। उन्होंने मस्जिद रानी हांस के स्थान पर हीर की रचना की थी। यह मस्जिद आज भी मिंटगुमरी कालेज के अहाते में मौजूद है।

वारिस शाह की हीर इतनी लोकप्रिय हुई कि लोग दूर-दूर से उसे सुनने आते थे। हीर सुनकर लोग दीवानों की तरह झूमने लगते थे। इस तरह वारिस शाह की हीर ने कई रांझे बना दिए। जो लोग वारिस शाह की हीर सुनकर झूमने लगते थे, उन्हें लोग रांझे कहने लगे। यह शब्द अब उनके लिए एक उपनाम बन गया है। हीर-रांझा की प्रेम कहानी ने पंजाबी लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ी है। यह कहानी प्रेम, विरह और संघर्ष का प्रतीक है। यह कहानी पंजाबी लोगों के जीवन और संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन चुकी है।

ਅੱਵਲ ਹਮਦ ਖ਼ੁਦਾਇ ਦਾ ਵਿਰਦ ਕੀਜੇ, ਇਸ਼ਕ ਕੀਤਾ ਸੂ ਜੱਗ ਦਾ ਮੂਲ ਮੀਆਂ ।
ਪਹਿਲੇ ਆਪ ਹੈ ਰਬ ਨੇ ਇਸ਼ਕ ਕੀਤਾ, ਮਾਸ਼ੂਕ ਹੈ ਨਬੀ ਰਸੂਲ ਮੀਆਂ ।
ਇਸ਼ਕ ਪੀਰ ਫ਼ਕੀਰ ਦਾ ਮਰਤਬਾ ਹੈ, ਮਰਦ ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਭਲਾ ਰੰਜੂਲ ਮੀਆਂ ।
ਖਿਲੇ ਤਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਬਾਗ਼ ਕਲੂਬ ਅੰਦਰ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਕੀਤਾ ਹੈ ਇਸ਼ਕ ਕਬੂਲ ਮੀਆਂ ।

सबसे पहले, भगवान की स्तुति करो, क्योंकि प्रेम ही दुनिया की जड़ है। पहले स्वयं भगवान ने प्रेम किया, और प्रेम का शिष्य है नबी-रसूल। प्रेम ही पीर-फकीर का दर्जा है, और प्रेम का भला पुरुष ऋषि है। उनके दिलों के अंदर फूलते हैं उनके बाग़, जिन्होंने प्रेम को स्वीकार किया है।

ਦੂਈ ਨਾਅਤ ਰਸੂਲ ਮਕਬੂਲ ਵਾਲੀ, ਜੈਂਦੇ ਹੱਕ ਨਜ਼ੂਲ ਲੌਲਾਕ ਕੀਤਾ ।
ਖ਼ਾਕੀ ਆਖ ਕੇ ਮਰਤਬਾ ਵਡਾ ਦਿੱਤਾ, ਸਭ ਖ਼ਲਕ ਦੇ ਐਬ ਥੀਂ ਪਾਕ ਕੀਤਾ ।
ਸਰਵਰ ਹੋਇਕੇ ਔਲੀਆਂ ਅੰਬੀਆਂ ਦਾ, ਅੱਗੇ ਹੱਕ ਦੇ ਆਪ ਨੂੰ ਖ਼ਾਕ ਕੀਤਾ ।
ਕਰੇ ਉੱਮਤੀ ਉੱਮਤੀ ਰੋਜ਼ ਕਿਆਮਤ, ਖੁਸ਼ੀ ਛੱਡ ਕੇ ਜੀਉ ਗ਼ਮਨਾਕ ਕੀਤਾ ।
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