स्वामी सब संसार के हो सांचे श्री भगवान लिरिक्स

स्वामी सब संसार के हो सांचे श्री भगवान लिरिक्स

स्वामी सब संसार के हो सांचे श्रीभगवान।।
स्थावर जंगम पावक पाणी धरती बीज समान।
सबमें महिमा थांरी देखी कुदरत के कुरबान।।
बिप्र सुदामा को दालद खोयो बाले की पहचान।
दो मुट्ठी तंदुलकी चाबी दीन्हयों द्रव्य महान।
भारत में अर्जुन के आगे आप भया रथवान।
अर्जुन कुलका लोग निहारयां छुट गया तीर कमान।
ना कोई मारे ना कोइ मरतो, तेरो यो अग्यान।
चेतन जीव तो अजर अमर है, यो गीतारों ग्यान।।
मेरे पर प्रभु किरपा कीजौ, बांदी अपणी जान।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर चरण कंवल में ध्यान।।
पद का अर्थ:
"स्वामी सब संसार के हो सांचे श्रीभगवान।"
यहाँ मीराबाई भगवान श्री कृष्ण को सर्वसंसार के स्वामी और सच्चे भगवान के रूप में संबोधित कर रही हैं।

"स्थावर जंगम पावक पाणी धरती बीज समान।"
मीराबाई भगवान की सर्वव्यापकता का वर्णन करते हुए कहती हैं कि वे स्थावर (स्थिर) और जंगम (चल) सभी जीवों में, पावक (आग), पाणी (पानी), धरती (पृथ्वी), और बीज (बीज) में समाए हुए हैं।

"सबमें महिमा थांरी देखी कुदरत के कुरबान।"
वे भगवान की महिमा को सभी प्राणियों में देखती हैं और कुदरत की सुंदरता पर नतमस्तक होती हैं।

"बिप्र सुदामा को दालद खोयो बाले की पहचान।"
यहाँ मीराबाई भगवान श्री कृष्ण की दीन-हीन भक्तों के प्रति दया का उल्लेख कर रही हैं, जैसे उन्होंने सुदामा ब्राह्मण को दाल-चिउड़े दिए।

"दो मुट्ठी तंदुलकी चाबी दीन्हयों द्रव्य महान।"
मीराबाई बताती हैं कि भगवान ने सुदामा को दो मुट्ठी चिउड़े दिए, जिससे उनका दरिद्रता दूर हो गया और वे धन्य हो गए।

"भारत में अर्जुन के आगे आप भया रथवान।"
यहाँ भगवान श्री कृष्ण के अर्जुन के रथ चालक बनने का संदर्भ है, जो उनकी विनम्रता और भक्तों के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

"अर्जुन कुलका लोग निहारयां छुट गया तीर कमान।"

अर्जुन के रथ पर भगवान श्री कृष्ण के होने से अर्जुन की विजय सुनिश्चित हो गई, जिससे उनके शत्रु भयभीत हो गए।

"ना कोई मारे ना कोइ मरतो, तेरो यो अग्यान।"
मीराबाई बताती हैं कि भगवान की इच्छा के बिना कोई किसी को मार नहीं सकता और न ही कोई मर सकता है; यह सब उनकी इच्छा पर निर्भर करता है।

"चेतन जीव तो अजर अमर है, यो गीतारों ग्यान।"
भगवान के ज्ञान के अनुसार, चेतन जीव अजर और अमर हैं; उनका आत्मा कभी नष्ट नहीं होता।

"मेरे पर प्रभु किरपा कीजौ, बांदी अपणी जान।"
मीराबाई भगवान से प्रार्थना करती हैं कि वे अपनी कृपा से उनकी आत्मा को शरण दें।

"मीरा के प्रभु गिरधर नागर चरण कंवल में ध्यान।"
अंत में, मीराबाई अपने प्रभु गिरधर नागर (श्री कृष्ण) के कमल के चरणों में ध्यान लगाने की बात करती हैं। 

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