श्री दशावतारस्तोत्रम श्री कृष्ण भगवान ( श्री विष्णु जी) की एक स्तुति है।
श्री दशावतारस्तोत्रम की रचना किसने की थी ?
श्री दशावतारस्तोत्रम की रचना वेदांताचार्य द्वारा हुई थी।
विभिन्न देवी देवताओं के अवतार होते हैं और उसे प्रकार से विष्णु जी के भी दस अवतार हैं जिन्हे दशावतार कहा जाता है। इस दशावतार स्त्रोतम के पाठ से साधक की हर प्रकार से रक्षा होती है और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। गुरवार के दिन इसका पाठ किया जाना चाहिए जिससे बुद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।
भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं गुरुवार को : भगवन विष्णु जी का प्रिय वार है गुरुवार। इस रोज विष्णु जी को प्रसन्न करना बहुत आसान होता है। इस रोज भगवान् विष्णु जी और सरस्वती जी की पूजा का अपना महत्त्व होता है। भगवान् विष्णु जी को पीला रंग प्रिय है और गुरुवार को की गयी पूजा इसलिए भी कारगर होती है क्यों की गुरुवार को धन सम्पदा प्रधान दिवस होता है और जिसका गुरु दृढ होता है उसकी आर्थिक स्थिति सबल होती है। गुरुवार को पीले रंग के वस्त्र धारण करने की कोशिश करे और पीले रंग का तिलक लगाए। केसर या हल्दी का तिलक लगाएं। प्रसाद के लिए गुड़ और चने के मिश्रण का उपयोग करे। पीले फूल, पीली मिठाई और पीले चावल का उपयोग करें। केले के पेड़ के पूजन का अपना महत्त्व होता है। बृहपति देव की पूजा भी आज के दिन की जानी चाहिए।
हिंदू धर्म में, भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में पूजा जाता है। वह दस अवतारों में प्रकट हुए हैं, जो मानवता को बुराई से बचाने और धर्म की रक्षा करने के लिए थे। विष्णु के दशावतार इस प्रकार हैं:
मत्स्य अवतार: इस अवतार में, विष्णु ने एक विशाल मछली का रूप धारण किया और मनु और उसकी पत्नी को प्रलय से बचाया।
कूर्म अवतार: इस अवतार में, विष्णु ने एक कछुए का रूप धारण किया और समुद्र मंथन में सहायता की।
वराह अवतार: इस अवतार में, विष्णु ने एक सूअर का रूप धारण किया और पृथ्वी को दैत्यों से बचाया।
नृसिंह अवतार: इस अवतार में, विष्णु ने आधा मनुष्य और आधा शेर का रूप धारण किया और दैत्य हिरण्यकश्यपु का वध किया।
वामन अवतार: इस अवतार में, विष्णु ने एक बौने का रूप धारण किया और दैत्य बलि को तीन पग भूमि का वरदान दिया। विष्णु ने अपने दूसरे और तीसरे पग में क्रमशः स्वर्ग और पृथ्वी को नाप लिया और बलि को हराया।
परशुराम अवतार: इस अवतार में, विष्णु ने एक ब्राह्मण योद्धा का रूप धारण किया और सहस्त्रबाहु नामक दैत्य का वध किया।
राम अवतार: इस अवतार में, विष्णु ने राजा दशरथ के पुत्र राम के रूप में अवतार लिया। उन्होंने रावण नामक राक्षस का वध किया और धर्म की रक्षा की।
कृष्ण अवतार: इस अवतार में, विष्णु ने एक गोपालक के रूप में अवतार लिया। उन्होंने अत्याचारी राजा कंस का वध किया और धर्म की रक्षा की।
बुद्ध अवतार: इस अवतार में, विष्णु ने बुद्ध के रूप में अवतार लिया। उन्होंने लोगों को धर्म और मोक्ष के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
कल्कि अवतार: यह अवतार अभी तक नहीं हुआ है। इस अवतार में, विष्णु एक घोड़े पर सवार होकर प्रकट होंगे और धर्म की रक्षा करेंगे।
विष्णु के दशावतार हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्हें अक्सर मंदिरों और चित्रों में चित्रित किया जाता है। विष्णु के दशावतार मानवता को बुराई से बचाने और धर्म की रक्षा करने का एक प्रतीक हैं। यह भी देखें You May Also Like