रंग हारा वाले दे चढ़ गए रंग होर चढ़के की लैना
रंग हारा वाले दे चढ़ गए रंग होर चढ़के की लैना
रंग हारांवाले दे चढ़ गए,
रंग होर चढ़ाके की लैणा।
नैना विच सतगुरु वस गए,
कोई होर वसाके की लैणा।
तेरे नाम दा फड़ लेया पल्ला ऐ,
मैंनूं लोकी कहंदे झल्ला ऐ।
नी मैं अपने श्याम दी कमली,
नी मैं बनके सयाणी की लैणा।
रंग हारांवाले दे चढ़ गए,
रंग होर चढ़ाके की लैणा।
गल्ल मुकदी ऐ मुक्काणी ऐ,
तेरे नाम दी लगन लगाणी ऐ।
मेरा बन गया हारांवाला,
नी मैं सबनूं बनाके की लैणा।
नैना विच सतगुरु वस गए,
कोई होर वसाके की लैणा।
असी अपना श्याम मनावांगे,
दुनिया तों पिछा छुड़ावांगे।
सानूं तेरी चौखट मिल गई,
दर-दर ते जाके की लैणा।
रंग हारांवाले दे चढ़ गए,
रंग होर चढ़ाके की लैणा।
तुस्सीं नाम दा जाम पिलाया ऐ,
तुस्सीं सानूं मस्त बनाया ऐ।
सानूं नाम दी मस्ती चढ़ गई,
असी होर चढ़ाके की लैणा।
नैना विच सतगुरु वस गए,
कोई होर वसाके की लैणा।
रंग होर चढ़ाके की लैणा।
नैना विच सतगुरु वस गए,
कोई होर वसाके की लैणा।
तेरे नाम दा फड़ लेया पल्ला ऐ,
मैंनूं लोकी कहंदे झल्ला ऐ।
नी मैं अपने श्याम दी कमली,
नी मैं बनके सयाणी की लैणा।
रंग हारांवाले दे चढ़ गए,
रंग होर चढ़ाके की लैणा।
गल्ल मुकदी ऐ मुक्काणी ऐ,
तेरे नाम दी लगन लगाणी ऐ।
मेरा बन गया हारांवाला,
नी मैं सबनूं बनाके की लैणा।
नैना विच सतगुरु वस गए,
कोई होर वसाके की लैणा।
असी अपना श्याम मनावांगे,
दुनिया तों पिछा छुड़ावांगे।
सानूं तेरी चौखट मिल गई,
दर-दर ते जाके की लैणा।
रंग हारांवाले दे चढ़ गए,
रंग होर चढ़ाके की लैणा।
तुस्सीं नाम दा जाम पिलाया ऐ,
तुस्सीं सानूं मस्त बनाया ऐ।
सानूं नाम दी मस्ती चढ़ गई,
असी होर चढ़ाके की लैणा।
नैना विच सतगुरु वस गए,
कोई होर वसाके की लैणा।
रंगहारा वाले दे चढ़ गए जय श्री शाम इस भजन को जरूर सुने
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हारांवाले (परमात्मा) का रंग ऐसा चढ़ा है कि अब किसी और रंग की जरूरत नहीं। सतगुरु नैनों में बस गए हैं, अब किसी और को मन में बिठाने की चाह नहीं। नाम का पल्ला थाम लिया है, दुनिया भले ही पागल कहे, पर यह पागलपन श्याम की भक्ति का है। सयाना बनने की अब कोई जरूरत नहीं, क्योंकि श्याम की कमली बनकर ही सच्चा सुख मिल गया है।
गल मुक गई, अब बस नाम की लगन लगी है। हारांवाला अपना बन गया है, अब दुनिया को कुछ और बनाने की इच्छा नहीं। दुनिया के बंधनों से मुक्ति पाकर, सिर्फ श्याम की चौखट पर मन रम गया है। दर-दर भटकने की अब क्या जरूरत, जब उनका दर मिल गया। नाम का जाम ऐसा पिलाया कि सारी मस्ती उसी में समा गई। यह मस्ती ऐसी है कि अब किसी और नशे की जरूरत नहीं। हारांवाले का रंग, सतगुरु का सान्निध्य, और नाम की मस्ती ही जीवन का सार है। अब और क्या चाहिए, जब मन, नैन, और आत्मा श्याम के रंग में रंग गए हैं।
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बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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हारांवाले (परमात्मा) का रंग ऐसा चढ़ा है कि अब किसी और रंग की जरूरत नहीं। सतगुरु नैनों में बस गए हैं, अब किसी और को मन में बिठाने की चाह नहीं। नाम का पल्ला थाम लिया है, दुनिया भले ही पागल कहे, पर यह पागलपन श्याम की भक्ति का है। सयाना बनने की अब कोई जरूरत नहीं, क्योंकि श्याम की कमली बनकर ही सच्चा सुख मिल गया है।
गल मुक गई, अब बस नाम की लगन लगी है। हारांवाला अपना बन गया है, अब दुनिया को कुछ और बनाने की इच्छा नहीं। दुनिया के बंधनों से मुक्ति पाकर, सिर्फ श्याम की चौखट पर मन रम गया है। दर-दर भटकने की अब क्या जरूरत, जब उनका दर मिल गया। नाम का जाम ऐसा पिलाया कि सारी मस्ती उसी में समा गई। यह मस्ती ऐसी है कि अब किसी और नशे की जरूरत नहीं। हारांवाले का रंग, सतगुरु का सान्निध्य, और नाम की मस्ती ही जीवन का सार है। अब और क्या चाहिए, जब मन, नैन, और आत्मा श्याम के रंग में रंग गए हैं।
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सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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