गोविंद तुम्हारे चरणों में एक प्रेम पुजारी आया है
गोविंद तुम्हारे चरणों में एक प्रेम पुजारी आया है
गोविंद, तुम्हारे चरणों में,
एक प्रेम पुजारी आया है।
गोविंद, तुम्हारे चरणों में,
एक दर्शन भिखारी आया है॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में जल का लोटा है,
मैं तुम्हें नहलाने आया हूँ।
बड़े प्रेम से नहायो मनमोहन,
मैं तुम्हें नहलाने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में रेशम वस्त्र है,
मैं तुम्हें पहनाने आया हूँ।
बड़े प्रेम से पहनो मनमोहन,
मैं तुम्हें पहनाने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में केसर-चंदन है,
मैं तिलक लगाने आया हूँ।
बड़े प्रेम से लगवायो मनमोहन,
मैं तिलक लगाने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में फूलों का गजरा है,
मैं तुम्हें पहराने आया हूँ।
बड़े प्रेम से पहरो मनमोहन,
मैं तुम्हें पहराने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में माखन-मिश्री है,
मैं भोग लगाने आया हूँ।
बड़े प्रेम से जीमो मनमोहन,
मैं तुम्हें जिमाने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में सोने की झारी है,
मैं तुम्हें पिलाने आया हूँ।
बड़े प्रेम से पीयो मनमोहन,
मैं तुम्हें पिलाने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में झालर-घंटा है,
मैं आरती करने आया हूँ।
बड़े प्रेम से आरती करने दो,
मैं आरती करने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में धूप और दीपक है,
मैं आरती करने आया हूँ।
बड़े प्रेम से आरती करने दो,
मैं आरती करने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरी इच्छा है प्रभु दर्शन की,
दुनिया से चित्त घबराया है।
मेरी बीच भंवर में नैया है,
प्रभु! तू ही एक खिवैया है॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
नहीं दुनिया में कोई मेरा है,
आफत ने मुझको घेरा है।
मुझे एक सहारा तेरा है,
जग ने मुझको ठुकराया है॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
एक प्रेम पुजारी आया है।
गोविंद, तुम्हारे चरणों में,
एक दर्शन भिखारी आया है॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में जल का लोटा है,
मैं तुम्हें नहलाने आया हूँ।
बड़े प्रेम से नहायो मनमोहन,
मैं तुम्हें नहलाने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में रेशम वस्त्र है,
मैं तुम्हें पहनाने आया हूँ।
बड़े प्रेम से पहनो मनमोहन,
मैं तुम्हें पहनाने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में केसर-चंदन है,
मैं तिलक लगाने आया हूँ।
बड़े प्रेम से लगवायो मनमोहन,
मैं तिलक लगाने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में फूलों का गजरा है,
मैं तुम्हें पहराने आया हूँ।
बड़े प्रेम से पहरो मनमोहन,
मैं तुम्हें पहराने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में माखन-मिश्री है,
मैं भोग लगाने आया हूँ।
बड़े प्रेम से जीमो मनमोहन,
मैं तुम्हें जिमाने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में सोने की झारी है,
मैं तुम्हें पिलाने आया हूँ।
बड़े प्रेम से पीयो मनमोहन,
मैं तुम्हें पिलाने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में झालर-घंटा है,
मैं आरती करने आया हूँ।
बड़े प्रेम से आरती करने दो,
मैं आरती करने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरे हाथों में धूप और दीपक है,
मैं आरती करने आया हूँ।
बड़े प्रेम से आरती करने दो,
मैं आरती करने आया हूँ॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
मेरी इच्छा है प्रभु दर्शन की,
दुनिया से चित्त घबराया है।
मेरी बीच भंवर में नैया है,
प्रभु! तू ही एक खिवैया है॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
नहीं दुनिया में कोई मेरा है,
आफत ने मुझको घेरा है।
मुझे एक सहारा तेरा है,
जग ने मुझको ठुकराया है॥
गोविंद, तुम्हारे चरणों में...
Govind Tumhare Charano Main Ek Prem Pujari Aaya Hain
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गोविंद के चरणों में एक प्रेमी हृदय आया है, जो न केवल भक्ति बल्कि पूरे समर्पण के साथ उनके सामने नतमस्तक है। यह प्रेम इतना गहरा है कि वह अपने प्रभु को जल से स्नान कराने, रेशम के वस्त्र पहनाने, केसर-चंदन का तिलक लगाने, फूलों का गजरा चढ़ाने, माखन-मिश्री का भोग लगाने और सोने की झारी से अमृत पिलाने को तत्पर है। हर कार्य में प्रेम की सुगंध है, हर भाव में मनमोहन के प्रति श्रद्धा है। आरती का दीपक और धूप लिए, वह प्रभु की महिमा गाता है, क्योंकि उसका मन केवल गोविंद के दर्शन में ही रमता है।
यह दुनिया उसे पराई लगती है, जहाँ उसका कोई नहीं। जीवन की नाव मझधार में डोल रही है, और चारों ओर मुश्किलें घेरे हुए हैं। दुनिया ने उसे ठुकराया, लेकिन गोविंद का सहारा उसे हर संकट से उबारने वाला है। वह जानता है कि प्रभु ही एकमात्र खेवनहार हैं, जो उसकी नाव को किनारे तक ले जाएंगे। गोविंद के चरणों में ही उसका ठिकाना है, वही उसका आश्रय है।
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श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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