भा गया मुझे द्वार तुम्हारा आया हाथ को जोड़ के

भा गया मुझे द्वार तुम्हारा आया हाथ को जोड़ के

भा गया मुझे द्वार तुम्हारा,
आया हाथ को जोड़ के,
गौरी सुत गणराज पधारो,
बीच सभा सब छोड़ के।।

द्वार तुम्हारे लेने आया,
कीर्तन में अब रस भर दो,
मैंने सब भक्तों से बोला,
"गणपति जी की जय बोलो!"
सब उठाएं हाथों को अपने,
दोनों हाथ को जोड़ के,
गौरी सुत गणराज पधारो,
बीच सभा सब छोड़ के।।

शिव गौरा के तुम गणेशा,
इतना मुझे भी बता दो तुम,
कैसे तुम्हें सब रिझाते,
वैसा मुझे सिखा दो तुम।
अबकी नंबर मेरा आया,
स्वागत करूं सब छोड़ के,
गौरी सुत गणराज पधारो,
बीच सभा सब छोड़ के।।

कर दो तुम अरदास गौरा को,
कीर्तन में शिव गौरा आएंगे,
चौखट पे तेरी आने वाले,
सब दिन मौज उड़ाएंगे।
कीर्तन में अब बरसेगा रस,
कीर्तन में आओ सब छोड़ के,
गौरी सुत गणराज पधारो,
बीच सभा सब छोड़ के।।

मैं ना जानूं पूजा थारी,
आस लगाई तेरे कीर्तन में,
दर्शन देने आओ देवा,
मेरा सब कुछ अर्पण है।
नाम करा दो इस ललित का,
भरी सभा के बीच में,
गौरी सुत गणराज पधारो,
बीच सभा सब छोड़ के।।

भा गया मुझे द्वार तुम्हारा,
आया हाथ को जोड़ के,
गौरी सुत गणराज पधारो,
बीच सभा सब छोड़ के।।


गौरी सूत गणराज पधारों || गणेश चतुर्थी स्पेशल भजन || ललित माली इंदौर #ganesh #गणेशजीकीआरती #bhakti

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SINGER - LALIT MALI
Mob No - 9907770327
Lyrics:- Lalit Mali | Aarti Mali
 
गणराज, गौरी-सुत, का द्वार वह पावन स्थल है, जहां भक्त अपने हृदय की पुकार और श्रद्धा के साथ हाथ जोड़कर पहुंचता है। उनका आह्वान भक्तों के कीर्तन को रस और भक्ति से भर देता है, जहां सारी सभा एक स्वर में उनकी जय-जयकार करती है। गणपति की कृपा ऐसी है कि वे भक्तों की हर अरदास को स्वीकार करते हैं और उनके जीवन को आनंदमय बनाते हैं। भक्त, चाहे वह पूजा की विधियां जानता हो या न जानता हो, अपनी सच्ची श्रद्धा के साथ गणेशजी के चरणों में सब कुछ अर्पित करता है, यह विश्वास रखते हुए कि उनकी उपस्थिति से हर सभा पवित्र और मंगलमय हो जाती है।

शिव और गौरा के लाडले गणेशजी की महिमा अपार है, और उनका आशीर्वाद भक्तों को सही मार्ग दिखाता है। कीर्तन में उनकी उपस्थिति से शिव और गौरा की कृपा भी बरसती है, और भक्तों का मन भक्ति के रंग में डूब जाता है। ललित जैसे भक्त अपनी विनम्र प्रार्थना के साथ गणपति से अपने नाम को अमर करने की कामना करते हैं, और उनकी कृपादृष्टि से हर मनोकामना पूर्ण होती है। यह वह पवित्र क्षण है, जब गणराज का आगमन सभा को आलोकित करता है, और भक्तों का जीवन उनके प्रेम और आशीर्वाद से संवर जाता है।

गणराज, गौरी-सुत, का द्वार वह पावन स्थल है, जहां भक्त अपने हृदय की पुकार और श्रद्धा के साथ हाथ जोड़कर पहुंचता है। उनका आह्वान भक्तों के कीर्तन को रस और भक्ति से भर देता है, जहां सारी सभा एक स्वर में उनकी जय-जयकार करती है। गणपति की कृपा ऐसी है कि वे भक्तों की हर अरदास को स्वीकार करते हैं और उनके जीवन को आनंदमय बनाते हैं। भक्त, चाहे वह पूजा की विधियां जानता हो या न जानता हो, अपनी सच्ची श्रद्धा के साथ गणेशजी के चरणों में सब कुछ अर्पित करता है, यह विश्वास रखते हुए कि उनकी उपस्थिति से हर सभा पवित्र और मंगलमय हो जाती है।

शिव और गौरा के लाडले गणेशजी की महिमा अपार है, और उनका आशीर्वाद भक्तों को सही मार्ग दिखाता है। कीर्तन में उनकी उपस्थिति से शिव और गौरा की कृपा भी बरसती है, और भक्तों का मन भक्ति के रंग में डूब जाता है। ललित जैसे भक्त अपनी विनम्र प्रार्थना के साथ गणपति से अपने नाम को अमर करने की कामना करते हैं, और उनकी कृपादृष्टि से हर मनोकामना पूर्ण होती है। यह वह पवित्र क्षण है, जब गणराज का आगमन सभा को आलोकित करता है, और भक्तों का जीवन उनके प्रेम और आशीर्वाद से संवर जाता है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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