कन्हैया दौड़े आते है कृष्णा भजन

कन्हैया दौड़े आते है कृष्णा भजन


अपने भगत की आँख में आँसू देख न पाते हैं,
कन्हैया दौड़े आते हैं…
कन्हैया दौड़े आते हैं…

जहाँ में शोर ऐसा नहीं कोई श्याम जैसा,
जहाँ के मालिक हैं, ये सभी से वाक़िफ़ हैं।
धर्म पताका निज हाथों से प्रभु फहराते हैं,
कन्हैया दौड़े आते हैं…
अपने भगत की आँख में आँसू देख न पाते हैं,
कन्हैया दौड़े आते हैं…

गए जो भूल इनको, धीर नहीं उनके मन की,
तिजोरी लाख भरी हो, मोटेरे महल खड़े हो।
हीरे-मोती से मेरे भगवन नहीं ललचाते हैं,
कन्हैया दौड़े आते हैं…
अपने भगत की आँख में आँसू देख न पाते हैं,
कन्हैया दौड़े आते हैं…

याद कर जग की गाथा, पार्थ के रथ को हाँका,
दिन में पाँचाली हारी, बढ़ा दी उसकी साड़ी।
ध्रुव, प्रह्लाद, नरसी और मीरा टेर लगाते हैं,
कन्हैया दौड़े आते हैं…
अपने भगत की आँख में आँसू देख न पाते हैं,
कन्हैया दौड़े आते हैं…


कन्हैया दौड़े आते है : कृष्ण भजन : Kanhiya Daude Aate Hai : Krishna Bhajan

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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