मन का मैल मिटाले बंदे वरना फिर पछतायेगा

मन का मैल मिटाले बंदे वरना फिर पछतायेगा

मन का मैल मिटाले बंदे,
वरना फिर पछतायेगा,
राम नाम का सुमिरन करले,
जन्म सफल हो जाएगा,
मन का मैल मिटाले बंदे,
वरना फिर पछतायेगा।

मंजिल तेरी वही ठिकाना,
फिर क्यों उसको जाने न,
तेरा और न कोई बंदे,
फिर तू क्यों ये माने न,
माटी का पुतला है तू,
माटी में मिल जाएगा,
राम नाम का सुमिरन करले,
जन्म सफल हो जाएगा,
मन का मैल मिटाले बंदे,
वरना फिर पछतायेगा।

दिल में तेरे अंधकार छिपा है,
अब तू इस में ज्योति जगाले,
राम राम के दीपक से,
मनका तू अंधिकार मिटाले,
खाली हाथ आया है तू,
खाली हाथ ही जाएगा,
राम नाम का सुमिरन करले,
जन्म सफल हो जाएगा,
मन का मैल मिटाले बंदे,
वरना फिर पछतायेगा।

चार दिनों का जीवन तेरा,
फिर वापिस ही जाना है,
करना है जो करले बंदे,
वरना तू पछतायेगा,
अभी उगा है सूरज तेरा,
कल को वो ढल जाएगा,
राम नाम का सुमिरन करले,
जन्म सफल हो जाएगा,
मन का मैल मिटाले बंदे,
वरना फिर पछतायेगा।


मन का मैल मिटा ले बंदे वरना फिर पश्तायेगा,राम नाम का सुमिरन कर ले जन्म सफल हो जाएगा

मन का मेल, काम क्रोध विकार भक्ति में बाधक हैं। भक्ति एक ऐसी साधना है, जिसमें मन को एकत्रित करके ईश्वर में लीन होना होता है। लेकिन जब मन में काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि विकार होते हैं, तो वे मन को भटकाते हैं और भक्ति में बाधा उत्पन्न करते हैं।
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