झलक बाँके बिहारी की मेरे इस मन में भायी है

झलक बाँके बिहारी की मेरे इस मन में भायी है


झलक बाँके बिहारी की,
मेरे इस मन में भायी है,
मधुर मुस्कान की महिमा,
मेरे होंठों ने गायी है॥

तुम्हारे प्यार में बेहद यहाँ,
दुख क्यों सहा मैंने?
हमारी क्यों ज़माने में,
अजब हालत बनाई है!
मधुर मुस्कान की महिमा,
मेरे होंठों ने गायी है॥

तुम्हारे नाम की माला तो,
हम दिन-रात जपते हैं,
अनोखी चाहतें लेकर,
तुम्हारी याद आयी है।
मधुर मुस्कान की महिमा,
मेरे होंठों ने गायी है॥

सुना है हमने ये स्वामी,
दयानिधि तुम कहलाते हो,
तभी तक़दीर भी मेरी,
मुझे इस दर पे लायी है।
मधुर मुस्कान की महिमा,
मेरे होंठों ने गायी है॥

कभी शबरी, कभी तुलसी,
कभी सूरा, कभी मीरा;
सुदामा भक्त जैसे से,
बहुत यारी निभायी है।
मधुर मुस्कान की महिमा,
मेरे होंठों ने गायी है॥


झलक बांके बिहारी की || Vrindavan Banke Bihari Ji Bhajan || Radha Krishna Bhajan 2024|| Uma Series

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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