ज्योत जली रे माँ की आए नवराते भजन

ज्योत जली रे माँ की आए नवराते भजन

(मुखड़ा)
ज्योत जली रे माँ की आए नवरात्रे,
हुई भीड़ अपार, देखो मैया कतार,
बोलो जयकारा, जयकारा,
ज्योत जली रे माँ की आए नवरात्रे।।

(अंतरा)
ध्यानु भगत ने महिमा गाई,
मैया से वरदान मिला,
सर को माँ की भेंट चढ़ाया,
भक्तों में सम्मान मिला,
जिसको माँ की ममता मिली रे,
जिसको माँ की ममता मिली रे,
उसको सारा जहान मिला।
पौड़ी पौड़ी चढ़ते चलो,
मैया जी को ध्याते।
पौड़ी पौड़ी चढ़ते चलो,
मैया जी को ध्याते।
हुई भीड़ अपार, देखो मैया कतार,
बोलो जयकारा, जयकारा,
ज्योत जली रे माँ की आए नवरात्रे।।

(अंतरा)
श्रीधर ने भी सपने में ही,
माँ का दर्शन पाया रे,
कन्या रूप में आ गई मैया,
खुशियों से हर्षाया रे।
माँ ने सदा ही निज भक्तों पे,
माँ ने सदा ही निज भक्तों पे,
अपना प्यार लुटाया रे।
शेरावाली खुश होती, दया बरसाती,
शेरावाली खुश होती, दया बरसाती।
हुई भीड़ अपार, देखो मैया कतार,
बोलो जयकारा, जयकारा,
ज्योत जली रे माँ की आए नवरात्रे।।

(अंतरा)
चोखानी ने अर्जी लगाई,
जगदंबे की चौखट पर,
सुनवाई करने मैया ने,
बिगड़ी बना दी करके मेहर।
सरिता माँ की भेंटें गाती,
सरिता माँ की भेंटें गाती,
उसकी पड़ेगी तुम पर नजर।
भक्तों चलो माँ के द्वारे, भजन सुनाते,
भक्तों चलो माँ के द्वारे, भजन सुनाते।
हुई भीड़ अपार, देखो मैया कतार,
बोलो जयकारा, जयकारा,
ज्योत जली रे माँ की आए नवरात्रे।।

(पुनरावृत्ति)
ज्योत जली रे माँ की आए नवरात्रे,
हुई भीड़ अपार, देखो मैया कतार,
बोलो जयकारा, जयकारा,
ज्योत जली रे माँ की आए नवरात्रे।।


Maa Teri Jyot Jala Rakhi hai | माँ तेरी ज्योत जला राखी है | Navratri Specials | Mata Bhajan

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Song - Puja Ki Thali Saja Rakhi Hai Maa Teri Jyot Jala Rakhi Hai
Lyrics : BrajMohan Ji Chouksey ( Premi Pagal )
 
नवरात्रि का पवित्र पर्व माँ की ज्योति के प्रज्वलन के साथ भक्तों के हृदय में एक अनुपम भक्ति और उत्साह की लहर लाता है। माँ के दरबार में अपार भीड़ और भक्तों की कतार उनकी महिमा और ममता का प्रतीक है, जहाँ हर कोई उनके दर्शन और कृपा की आस में जयकारे लगाता है। भक्त अपनी भेंट और भक्ति के माध्यम से माँ की ममता को प्राप्त करता है, जो उसे सारे संसार के सुखों से भी बढ़कर अनुभव होती है। यह वह समय है जब भक्त पौड़ी-पौड़ी चढ़कर माँ के चरणों तक पहुँचता है, उनके ध्यान में लीन होकर अपने जीवन को उनकी कृपा से संवारता है। यह भक्ति का वह स्वरूप है, जो माँ की ज्योति को हर हृदय में प्रज्वलित करता है और भक्तों को उनके प्रेम में डुबो देता है।

माँ की कृपा इतनी करुणामयी है कि वह अपने भक्तों की हर पुकार सुनती है, चाहे वह सपने में दर्शन हो या उनकी चौखट पर अर्जी। माँ का प्यार और दया भक्तों के बिगड़े काम को बना देती है, और उनकी भेंट गाने वाला हर भक्त उनकी नजर में विशेष स्थान पाता है। चाहे वह श्रीधर हो या चोखानी, माँ अपने भक्तों पर सदा अपनी ममता लुटाती हैं, और उनके जीवन को खुशियों से हर्षित करती हैं। भक्तों का यह विश्वास कि माँ की एक नजर उनके सारे दुख हर लेगी, उन्हें बार-बार माँ के द्वार की ओर खींचता है। यह नवरात्रि का वह उत्सव है, जो माँ के भजन और जयकारों के माध्यम से भक्तों के मन को शांति और कल्याण से भर देता है, और उनकी ज्योति को सदा के लिए उनके हृदय में जलाए रखता है।
 
हाँ, नवरात्रि में जिन तीन शक्तियों—इच्छा शक्ति, क्रिया शक्ति और ज्ञान शक्ति—की बात की जाती है, उनका वैज्ञानिक आधार हमारे शरीर के ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) और नाड़ियों से जुड़ा हुआ है। योग और आयुर्वेद के अनुसार, मानव शरीर में सात प्रमुख चक्र (ऊर्जा केंद्र) होते हैं, जो मेरुदंड (स्पाइन) के साथ स्थित हैं और हमारे शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक विकास से जुड़े हैं।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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