प्रभुजी तुम बिन कौन सहारा भजन
प्रभुजी तुम बिन कौन सहारा भजन
साखी:
जो गणपति को ध्याये, परम सुखी हो जाए।
जो शंकर को पूजे, विपदा पास न आए।।
राम नाम के जप से, मन पावन हो जाए।
गोपाला जो बोले, भव सागर तर जाए।।
प्रभुजी तुम बिन कौन सहारा।
कौन है पालनहारा, कौन है पालनहारा।।
जय गणपति सिद्धि विनायक जय।
जय गणपति जय सुखदायक जय।।
काली रातें उजियारे दिन सब है महिमा तेरी।
और कहीं अब जाऊं न भगवन तुझमें श्रद्धा मेरी।।
राह दिखाई तुने मुझको छाया जब अंधियारा।।
कौन है पालनहारा, कौन है पालनहारा।।
जय शंकर कष्ट निवारक जय।
जय भोले जग के पालक जय।।
कल क्या होगा जानू ना मैं, सब कुछ तुझपे छोड़ा।
तूने मुझको पास बिठाया जब सबने मुख मोड़ा।।
तू ही सच्चा मीत कहाए, बेगाना जग सारा।।
कौन है पालनहारा, कौन है पालनहारा।।
बोलो राम सिया राम।
जपो राम सिया राम।।
दुःख सुख मेला धूप छांव का, आते जाते रहना।
जाने कब तक और रहेगा इन सांसों का गहना।।
तूने उसको दिया सहारा, जिसने तुझे पुकारा।।
प्रभुजी तुम बिन कौन सहारा।
कौन है पालनहारा, कौन है पालनहारा।।
बोलो जय राधेश्याम।
घनश्याम राधे श्याम।।
प्रभुजी तुम बिन कौन सहारा।
कौन है पालनहारा, कौन है पालनहारा।।
जय गणपति सिद्धि विनायक जय।
जय गणपति जय सुखदायक जय।।
जो गणपति को ध्याये, परम सुखी हो जाए।
जो शंकर को पूजे, विपदा पास न आए।।
राम नाम के जप से, मन पावन हो जाए।
गोपाला जो बोले, भव सागर तर जाए।।
प्रभुजी तुम बिन कौन सहारा।
कौन है पालनहारा, कौन है पालनहारा।।
जय गणपति सिद्धि विनायक जय।
जय गणपति जय सुखदायक जय।।
काली रातें उजियारे दिन सब है महिमा तेरी।
और कहीं अब जाऊं न भगवन तुझमें श्रद्धा मेरी।।
राह दिखाई तुने मुझको छाया जब अंधियारा।।
कौन है पालनहारा, कौन है पालनहारा।।
जय शंकर कष्ट निवारक जय।
जय भोले जग के पालक जय।।
कल क्या होगा जानू ना मैं, सब कुछ तुझपे छोड़ा।
तूने मुझको पास बिठाया जब सबने मुख मोड़ा।।
तू ही सच्चा मीत कहाए, बेगाना जग सारा।।
कौन है पालनहारा, कौन है पालनहारा।।
बोलो राम सिया राम।
जपो राम सिया राम।।
दुःख सुख मेला धूप छांव का, आते जाते रहना।
जाने कब तक और रहेगा इन सांसों का गहना।।
तूने उसको दिया सहारा, जिसने तुझे पुकारा।।
प्रभुजी तुम बिन कौन सहारा।
कौन है पालनहारा, कौन है पालनहारा।।
बोलो जय राधेश्याम।
घनश्याम राधे श्याम।।
प्रभुजी तुम बिन कौन सहारा।
कौन है पालनहारा, कौन है पालनहारा।।
जय गणपति सिद्धि विनायक जय।
जय गणपति जय सुखदायक जय।।
इस भजन के माध्यम से भक्त भगवान गणपति, शंकर, राम, और गोपाल की महिमा का गुणगान करते हैं और उनकी कृपा से जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाने की प्रार्थना करते हैं।
Prabhuji Tum Bin Kaun Sahara
श्री गणेश के बारे में : श्री शिव और पार्वती के पुत्र हैं गणेश जी। श्री गणेश गणों के स्वामी हैं इसलिए इन्हे गणेश कहा जाता है। श्री गणेश जी के मस्तस्क पर हाथी होने के कारन इनको गजानंद और गजानन भी कहा जाता हैं। श्री गणेश जी को समस्त शुभ कार्यों में सर्वप्रथम पूजा जाता है इसलिए इन्हे प्रथम पूज्य भी कहा जाता है। इनको पूजने वाले सम्प्रदाय को गाणपत्य कहा जाता है। श्री गणेश को कई नामों से याद किया जाता है ये हैं सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश,विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन। गणेश जी का वाहन चूहा माना जाता है।
प्रभुजी के बिना जीवन में कोई स्थायी सहारा नहीं मिलता। संसार के सभी संबंध, चाहे वे माता-पिता हों, संतान हों या मित्र, अंततः स्वार्थ और अस्थिरता के कारण टूट जाते हैं। इस अस्थिरता के बीच प्रभु की कृपा ही वह अनमोल आधार है, जो हर विपदा में सुरक्षा प्रदान करता है। गणपति की सिद्धि, शंकर की कष्ट निवारक शक्ति, राम नाम की पवित्रता और गोपाल की उद्धार शक्ति से मन और जीवन पवित्र होता है, और भवसागर पार हो जाता है।
अंधकारमय जीवन में प्रभु की छाया आशा की किरण बन जाती है, जो हर भय और संकट को दूर कर देती है। जब सबने साथ छोड़ा हो, तब भी प्रभु की ममता और संरक्षण का अनुभव होता है, जो जीवन को स्थिरता और शांति प्रदान करता है। प्रभु के नाम का जप मन को निर्मल करता है, और उनके चरणों में समर्पण से हर दुःख का अंत होता है।
जीवन में सुख-दुख, धूप-छाँव का मेला चलता रहता है, पर प्रभु की शरण में रहने वाला हर परिस्थिति में सहारा पाता है। उनके प्रति पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से मनुष्य को न केवल सांसारिक संकटों से मुक्ति मिलती है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और परम आनंद की प्राप्ति भी होती है। इसलिए प्रभु के बिना कोई सहारा नहीं, कोई पालनहार नहीं, जो जीवन की गहराई में स्थायी शांति दे सके।
अंधकारमय जीवन में प्रभु की छाया आशा की किरण बन जाती है, जो हर भय और संकट को दूर कर देती है। जब सबने साथ छोड़ा हो, तब भी प्रभु की ममता और संरक्षण का अनुभव होता है, जो जीवन को स्थिरता और शांति प्रदान करता है। प्रभु के नाम का जप मन को निर्मल करता है, और उनके चरणों में समर्पण से हर दुःख का अंत होता है।
जीवन में सुख-दुख, धूप-छाँव का मेला चलता रहता है, पर प्रभु की शरण में रहने वाला हर परिस्थिति में सहारा पाता है। उनके प्रति पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से मनुष्य को न केवल सांसारिक संकटों से मुक्ति मिलती है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और परम आनंद की प्राप्ति भी होती है। इसलिए प्रभु के बिना कोई सहारा नहीं, कोई पालनहार नहीं, जो जीवन की गहराई में स्थायी शांति दे सके।
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