पारब्रह्म के तेज का कैसा है उनमान मीनिंग

पारब्रह्म के तेज का कैसा है उनमान मीनिंग

 
पारब्रह्म के तेज का, कैसा है उनमान। कहिबे कूं सोभा नहीं, देख्याही परवान॥

पारब्रह्म के तेज का, कैसा है उनमान।
कहिबे कूं सोभा नहीं, देख्याही परवान॥

Paarbrahm Ke Tej Ka, Kaisa Hai Unmaan,
Kahibe Ku Shobha Nahi, Dekhyahi Pawaan.

कबीर दोहा / साखी हिंदी शब्दार्थ

  • पारब्रह्म-पूर्ण ब्रह्म।
  • तेज का- प्रकाश और तेज का।
  • उनमान-अनुमान।
  • कहिबे कूं- कहने को।
  • सोभा नहीं- शोभा दिखाई नहीं देती है।
  • देख्याही-देखने पर।
  • परवान-प्रमाण।

कबीर दोहा हिंदी मीनिंग

उस परम पूर्ण ब्रह्म की शोभा का कोई अनुमान नहीं लगा सकता है, उसके तेज के विषय में स्वंय के ज्ञान के आधार पर कुछ कहा नहीं जा सकता है. पूर्ण परमब्रह्म की शोभा को बोलकर भी बताया नहीं जा सकता है. कहने से उसकी शोभा का वर्णन नहीं किया जा सकता है, उसे देखकर ही उसके गुणों के बारे में कहा जा सकता है. इस साखी का भाव है की पूर्ण परम ब्रह्म के तेज को हम कहकर बता नहीं सकते है, ऐसा विलक्षण परम पूर्ण ब्रह्म. उसके अनुपम रस की शोभा अत्यधिक विशाल है जिसे शब्दों में बांधना संभव नहीं है. उससे साक्षात परिचय प्राप्त करके, उसको देखने पर ही उसके गुणों का पता चलता है. 
 
उसका स्वरुप विशाल होने के साथ ही सूक्ष्म भी है, जैसे पहुप में सुगंध होती है ऐसे ही पूर्ण परमात्मा का स्वरुप है. अनुमान से आशय है की हम इश्वर के स्वरुप के बारे में मात्र अनुमान ही लगा सकते हैं, वास्तविक रूप से हम उसके विषय में कुछ नहीं जानते हैं. हमने उसे विभिन्न आकार और स्वरुप स्वंय की सुविधा या अज्ञान के चलते दे रखे हैं.  
 
वह किसी बंधन या आकार, स्थल आदि का मोहताज नहीं होता है.  विशेष है की वह कण कण में व्याप्त है, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड उसकी रचना है, लेकिन वह वहां भी नहीं है.  यदि कोई खोजने वाला हो तो उसे स्वंय के हृदय में खोज सकता है. 
 

Kabir: the poet, saint and weaver of Ancient India (FULL VERSION)
 
Next Post Previous Post