कोई पान्दा करमा वाला वन्गा इश्क दिया

कोई पान्दा करमा वाला वन्गा इश्क दिया


कोई पाता है करमों वाला, इश्क की ये वन्गा (बेड़ियाँ),
कोई पाता है करमों वाला, इश्क की ये वन्गा।

भक्तों ने ही पहनी हैं ये वन्गा,
भक्ति का लिया उन्होंने सारा नज़ारा — इश्क की वन्गा,
कोई पाता है करमों वाला, इश्क की ये वन्गा।

इश्क की वन्गा पहन कर बुल्ला नाचा,
घुंघरुओं की झंकार में डूबा — इश्क की वन्गा,
कोई पाता है करमों वाला, इश्क की ये वन्गा।

बाईजी ने ये वन्गा पहनी,
मुरशद पीर की मेहर पाई,
उसके नाम की माला फेरता — इश्क की वन्गा,
कोई पाता है करमों वाला, इश्क की ये वन्गा।

वन्गा पहनकर नमन गाता है,
हर समय हरि का सिमरन करता है,
रब से टूटे ना कभी तार — इश्क की वन्गा,
कोई पाता है करमों वाला, इश्क की ये वन्गा।

कोई पाता है करमों वाला, इश्क की ये वन्गा।
कोई पाता है करमों वाला, इश्क की ये वन्गा।


Chola Anniversary New Bhajan || Koi Panda Karma Wala Vanga Ishk Diyan || Naman Chadha || NC Bhajans

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सतगुरु की महिमा अपरंपार और अनंत है। सतगुरु वह दिव्य सत्ता हैं, जो शिष्य के जीवन में अज्ञान के अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उनकी कृपा से शिष्य को आत्मिक उन्नति, शांति और मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। सतगुरु शिष्य के मन में श्रद्धा, प्रेम और समर्पण का भाव भर देते हैं, जिससे उसका जीवन सार्थक और प्रकाशित हो जाता है।

दूसरे पैराग्राफ में, सतगुरु की महिमा का भाव विस्तार यह है कि उनकी शरण में आने से शिष्य के सभी पाप-कर्म नष्ट होते हैं और पुण्यों में वृद्धि होती है। सतगुरु ही शिष्य को परमात्मा से जोड़ते हैं और उसे जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझाते हैं। उनकी कृपा से शिष्य को जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है और उसका मन सकारात्मकता, आशा और विश्वास से भर जाता है। इस प्रकार, सतगुरु की महिमा ही वह अनंत प्रकाश है, जो शिष्य के जीवन को हमेशा के लिए प्रकाशित कर देती है।
 
Sub Title : Ni Me Nach Nach Kamli Ho jana || नी मे नच नच कमली होजाना ढोलीया वे ढोल बजाई जा 
Bhajan Parwahak :- Naman Chadha 
Channel Label : NC Bhajans
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सतगुरु की कृपा से भक्ति का अनमोल वंगा, जो कर्मों के पुण्य से मिलता है, प्राप्त होता है। इस वंगे को पाकर भक्त आनंद में डूबकर भक्ति का नजारा देखता है। यह वंगा पहनकर बुल्ले शाह की तरह मन नाच उठता है, और घुंघरुओं की ध्वनि में प्रेम का दर्शन होता है। गुरु और पीर की मेहर से यह वंगा मिलता है, जिसके साथ उनके नाम की माला फेरी जाती है। इस वंगे को धारण कर मन हर पल हरि का सिमरन करता है, और रब के साथ प्रेम का तार कभी नहीं टूटता। यह भजन सतगुरु की कृपा से मिलने वाले भक्ति के प्रेम, उनके नाम के सिमरन से अटूट रिश्ते, और आनंदमयी जीवन की भावना को व्यक्त करता है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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