पांच मोहर का साहबा पीला मंगाद्यो जी

पांच मोहर का साहबा पीला मंगाद्यो जी

पांच मोहर का साहबा, पीला मंगाद्यो जी,
कोए पांच पचीसी, गढ़ बी सी गाढ़ा मारू जी।
गाढ़ा मारू जी, पीला रंग गाद्यो जी।।

किन म्हारी भोली साधण ल्याय दिखाया जी,
किन थारे आल लगाई जी।
गाढ़ा मारू जी, पीला रंग गाद्यो जी।।

छोटी सी नणदल साहबा, आल लगाई जी,
अल्ले तै पल्ले साहबा, मोर पपेया जी।
बीच–बीच लाल हजारी जी।
गाढ़ा मारू जी, पीला रंग गाद्यो जी।।

कोए सास–नणद मुख जोड़्या जी,
गाढ़ा मारू जी, पीला रंग गाद्यो जी।।

आंख ना खोले जच्चा, मुख तै ना बोले जी,
कोए जच का राजन कुम्हला डोले जी।
गाढ़ा मारू जी, पीला रंग गाद्यो जी।।

दिल्ली सहर तै साहबा, बैद बुलाद्यो जी,
कोए जच की नाड़ी दिखाद्यो जी।
गाढ़ा मारू जी, पीला रंग गाद्यो जी।।

झाड़ै तो झाड़ै रे बैदा, रोक रुपैया जी,
कोए जच्चा के जीव की बधाई जी।
गाढ़ा मारू जी, पीला रंग गाद्यो जी।।

आंख्यां भी खोले जच्चा, मुख तै भी बोले जी,
कोए जच का राजन हंसता डोले जी।
मैं मन ल्यूं थी, म्हारा सुघड़ साहबे का जी,
कोए प्यारी सू के दुप्यारी जी।
गाढ़ा मारू जी, पीला रंग गाद्यो जी।।



पीला रंगा दयो जी (दिल्ली शहर तै सायबा पीला मंगाया जी) - जच्चा गीत | JACCHA GEET | PEELA RANGA DYO JI

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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