पंछी रे उड़ चल अपने देश भजन
पंछी रे उड़ चल अपने देश भजन
पंछी रे, पंछी रे
उड़ चल अपने देश, ओ रे पंछी रे
जगत तो है प्रदेश, पंछी रे उड़ चल अपने देश।
जग-प्रदेश से उड़ना है तुझको,
प्रभु चरणों में जुड़ना है तुझको।
आया तेरा संदेश, पंछी रे।
ऐ पंछी, तेरा देश पराया,
आया वहीं से, वहीं पे उजाला।
हे पंछी, तेरा देश पराया,
जाए वहीं, यहाँ से तू आया।
आया तेरा आदेश, पंछी रे।
उड़ चल अपने देश।
ऐ पंछी, तेरी दर्द कहानी,
प्रदेश ने तेरी कदर न जानी।
बन गया निठुर विदेश, पंछी रे।
उड़ चल अपने देश।
तेरे बिन लागे न मन,
तेरे बिन जीना भी क्या?
तेरे बिन जीना भी क्या, क्या, क्या?
उड़ चल अपने देश, ओ रे पंछी रे
जगत तो है प्रदेश, पंछी रे उड़ चल अपने देश।
जग-प्रदेश से उड़ना है तुझको,
प्रभु चरणों में जुड़ना है तुझको।
आया तेरा संदेश, पंछी रे।
ऐ पंछी, तेरा देश पराया,
आया वहीं से, वहीं पे उजाला।
हे पंछी, तेरा देश पराया,
जाए वहीं, यहाँ से तू आया।
आया तेरा आदेश, पंछी रे।
उड़ चल अपने देश।
ऐ पंछी, तेरी दर्द कहानी,
प्रदेश ने तेरी कदर न जानी।
बन गया निठुर विदेश, पंछी रे।
उड़ चल अपने देश।
तेरे बिन लागे न मन,
तेरे बिन जीना भी क्या?
तेरे बिन जीना भी क्या, क्या, क्या?
पंछी रे || श्री रसिका पागल महाराज जी || पागलो की टोली || POPULAR KRISHNA BHAJAN
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Author - Saroj Jangir
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