मिल मेरे प्रीतमा जियो तुध बिन खरी मीनिंग
यह शबद श्री गुरु अर्जन देव जी द्वारा रचित है। इसमें एक भक्त के हृदय की उस गहरी तड़प का वर्णन है, जो अपने प्रभु से मिलन की इच्छा रखता है। भक्त कहता है कि प्रभु के बिना उसे न तो कोई सुख मिलता है और न ही मन को शांति। वह गुरु की शरण में जाकर मार्गदर्शन मांगता है, क्योंकि सच्चा आनंद और सुकून केवल प्रभु के मिलाप से ही प्राप्त होता है।
शबद के अंत में यह संदेश दिया गया है कि जो व्यक्ति प्रेम और भक्ति से प्रभु का स्मरण करता है, उसे सदा के लिए सुख और शांति प्राप्त होती है। प्रभु से जुड़ा हुआ मन कभी भी सच्चे अर्थों में बिछुड़ता नहीं। यह शबद प्रभु-मिलन की लालसा, प्रेम और भक्ति की महिमा को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त करता है।
MIL MERE PREETMA JIYO | BHAI SURINDER SINGH (JODHPURI) | MIL MERE PREETMA JIYO
"मिल मेरे प्रीतमा जिउ" श्री गुरु अर्जन देव जी द्वारा रचित एक सुंदर शबद है। इस शबद में आत्मा की अपने प्रिय प्रभु से मिलने की गहरी चाह और तड़प का वर्णन किया गया है। प्रभु से बिछुड़कर आत्मा दुखी रहती है और उसे कहीं भी सच्चा सुख नहीं मिलता। वह गुरु से प्रार्थना करती है कि उसे ऐसा मार्ग दिखाएँ जिससे वह अपने प्रभु का मिलाप प्राप्त कर सके।
इस शबद का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य का सच्चा सुख और जीवन का वास्तविक उद्देश्य परमात्मा से जुड़ना है। गुरु की कृपा, नाम-सिमरन और भक्ति के द्वारा आत्मा प्रभु के निकट पहुँच सकती है। जब प्रभु का मिलाप हो जाता है, तब मन के सभी दुख, चिंताएँ और बेचैनियाँ समाप्त हो जाती हैं।
सिख धर्म में यह शबद विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह प्रभु-प्रेम, भक्ति और गुरु की महिमा को दर्शाता है। यह हमें याद दिलाता है कि संसार की वस्तुओं से स्थायी सुख नहीं मिलता, बल्कि सच्ची शांति और आनंद केवल प्रभु के नाम में ही प्राप्त होते हैं। जो व्यक्ति प्रेम और श्रद्धा के साथ प्रभु का स्मरण करता है, वह अंततः परम आनंद और आत्मिक शांति को प्राप्त करता है।
शबद के अंत में यह संदेश दिया गया है कि जो व्यक्ति प्रेम और भक्ति से प्रभु का स्मरण करता है, उसे सदा के लिए सुख और शांति प्राप्त होती है। प्रभु से जुड़ा हुआ मन कभी भी सच्चे अर्थों में बिछुड़ता नहीं। यह शबद प्रभु-मिलन की लालसा, प्रेम और भक्ति की महिमा को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त करता है।
मिल मेरे प्रीतमा जियो तुध बिन खरी मीनिंग
Punjabi
ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ ਤੁਧੁ ਬਿਨੁ ਖਰੀ ਨਿਮਾਣੀ ॥
ਮੈ ਨੈਣੀ ਨੀਦ ਨ ਆਵੈ ਜੀਉ ਭਾਵੈ ਅੰਨੁ ਨ ਪਾਣੀ ॥
ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ.
ਪਾਣੀ ਅੰਨੁ ਨ ਭਾਵੈ ਮਰੀਐ ਹਾਵੈ ਬਿਨੁ ਪਿਰ ਕਿਉ ਸੁਖੁ ਪਾਈਐ ॥
ਗੁਰ ਆਗੈ ਕਰਉ ਬਿਨੰਤੀ ਜੇ ਗੁਰ ਭਾਵੈ ਜਿਉ ਮਿਲੈ ਤਿਵੈ ਮਿਲਾਈਐ ॥
ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ.
ਆਪੇ ਮੇਲਿ ਲਏ ਸੁਖਦਾਤਾ ਆਪਿ ਮਿਲਿਆ ਘਰਿ ਆਏ ॥
ਨਾਨਕ ਕਾਮਣਿ ਸਦਾ ਸੁਹਾਗਣਿ ਨਾ ਪਿਰੁ ਮਰੈ ਨ ਜਾਏ ॥
ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ.
ਮੈ ਨੈਣੀ ਨੀਦ ਨ ਆਵੈ ਜੀਉ ਭਾਵੈ ਅੰਨੁ ਨ ਪਾਣੀ ॥
ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ.
ਪਾਣੀ ਅੰਨੁ ਨ ਭਾਵੈ ਮਰੀਐ ਹਾਵੈ ਬਿਨੁ ਪਿਰ ਕਿਉ ਸੁਖੁ ਪਾਈਐ ॥
ਗੁਰ ਆਗੈ ਕਰਉ ਬਿਨੰਤੀ ਜੇ ਗੁਰ ਭਾਵੈ ਜਿਉ ਮਿਲੈ ਤਿਵੈ ਮਿਲਾਈਐ ॥
ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ.
ਆਪੇ ਮੇਲਿ ਲਏ ਸੁਖਦਾਤਾ ਆਪਿ ਮਿਲਿਆ ਘਰਿ ਆਏ ॥
ਨਾਨਕ ਕਾਮਣਿ ਸਦਾ ਸੁਹਾਗਣਿ ਨਾ ਪਿਰੁ ਮਰੈ ਨ ਜਾਏ ॥
ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ.
"ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ ਤੁਧੁ ਬਿਨੁ ਖਰੀ ਨਿਮਾਣੀ ॥
ਮੈ ਨੈਣੀ ਨੀਦ ਨ ਆਵੈ ਜੀਉ ਭਾਵੈ ਅੰਨੁ ਨ ਪਾਣੀ ॥
ਪਾਣੀ ਅੰਨੁ ਨ ਭਾਵੈ ਮਰੀਐ ਹਾਵੈ ਬਿਨੁ ਪਿਰ ਕਿਉ ਸੁਖੁ ਪਾਈਐ ॥
ਗੁਰ ਆਗੈ ਕਰਉ ਬਿਨੰਤੀ ਜੇ ਗੁਰ ਭਾਵੈ ਜਿਉ ਮਿਲੈ ਤਿਵੈ ਮਿਲਾਈਐ ॥
ਆਪੇ ਮੇਲਿ ਲਏ ਸੁਖਦਾਤਾ ਆਪਿ ਮਿਲਿਆ ਘਰਿ ਆਏ ॥
ਨਾਨਕ ਕਾਮਣਿ ਸਦਾ ਸੁਹਾਗਣਿ ਨਾ ਪਿਰੁ ਮਰੈ ਨ ਜਾਏ ॥੪॥੨॥"
(ਗਉੜੀ ਮਹਲਾ ੩ ॥)
ਮੈ ਨੈਣੀ ਨੀਦ ਨ ਆਵੈ ਜੀਉ ਭਾਵੈ ਅੰਨੁ ਨ ਪਾਣੀ ॥
ਪਾਣੀ ਅੰਨੁ ਨ ਭਾਵੈ ਮਰੀਐ ਹਾਵੈ ਬਿਨੁ ਪਿਰ ਕਿਉ ਸੁਖੁ ਪਾਈਐ ॥
ਗੁਰ ਆਗੈ ਕਰਉ ਬਿਨੰਤੀ ਜੇ ਗੁਰ ਭਾਵੈ ਜਿਉ ਮਿਲੈ ਤਿਵੈ ਮਿਲਾਈਐ ॥
ਆਪੇ ਮੇਲਿ ਲਏ ਸੁਖਦਾਤਾ ਆਪਿ ਮਿਲਿਆ ਘਰਿ ਆਏ ॥
ਨਾਨਕ ਕਾਮਣਿ ਸਦਾ ਸੁਹਾਗਣਿ ਨਾ ਪਿਰੁ ਮਰੈ ਨ ਜਾਏ ॥੪॥੨॥"
(ਗਉੜੀ ਮਹਲਾ ੩ ॥)
ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ ਤੁਧੁ ਬਿਨੁ ਖਰੀ ਨਿਮਾਣੀ ॥ ਮੈ ਨੈਣੀ ਨੀਦ ਨ ਆਵੈ ਜੀਉ ਭਾਵੈ ਅੰਨੁ ਨ ਪਾਣੀ ॥ ਪਾਣੀ ਅੰਨੁ ਨ ਭਾਵੈ ਮਰੀਐ ਹਾਵੈ ਬਿਨੁ ਪਿਰ ਕਿਉ ਸੁਖੁ ਪਾਈਐ ॥ ਗੁਰ ਆਗੈ ਕਰਉ ਬਿਨੰਤੀ ਜੇ ਗੁਰ ਭਾਵੈ ਜਿਉ ਮਿਲੈ ਤਿਵੈ ਮਿਲਾਈਐ ॥ ਆਪੇ ਮੇਲਿ ਲਏ ਸੁਖਦਾਤਾ ਆਪਿ ਮਿਲਿਆ ਘਰਿ ਆਏ ॥ ਨਾਨਕ ਕਾਮਣਿ ਸਦਾ ਸੁਹਾਗਣਿ ਨਾ ਪਿਰੁ ਮਰੈ ਨ ਜਾਏ ॥੪॥੨॥
Hindi
मिल मेरे प्रीतमा जियो
तुध बिन खरी निमाणी
मैं नैणी नींद न आवै जियो,
भावै अन्न न पाणी
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
पाणी अन्न न भावै, मरीअै हावै
बिन पिर क्यों सुख पाईअै
गुर आगै करौ बिनंती, जे गुर भावै
ज्यों मिलै तिवै मिलाईए
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
आपे मेल लए सुखदाता
आप मिलेया घर आए
नानक कामण सदा सुहागण
ना पिर मरै न जाए
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
तुध बिन खरी निमाणी
मैं नैणी नींद न आवै जियो,
भावै अन्न न पाणी
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
पाणी अन्न न भावै, मरीअै हावै
बिन पिर क्यों सुख पाईअै
गुर आगै करौ बिनंती, जे गुर भावै
ज्यों मिलै तिवै मिलाईए
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
आपे मेल लए सुखदाता
आप मिलेया घर आए
नानक कामण सदा सुहागण
ना पिर मरै न जाए
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
Mil Mere Preetma Jiyo
Tudh Bin Khari Nimaani
Main Naini Neend Na Aavai Jiyo
Bhaavai Ann Na Paani
Mil Mere Preetma Jiyo.
Paani Ann Na Bhavai, Mariyei Haavai
Bin Pir, Kyon Sukh Paiye
Gur Aage Karau Binanti, Je Gur Bhavai
Jyon Milai Tivai Milaiyiye
Mil Mere Preetma Jiyo.
Aape Mel Laye Sukhdata
Aap Mileya Ghar Aaye
Nanak Kaaman Sada Suhagan
Na Pir Marai Na Jaye
Mil Mere Preetma Jiyo.
Tudh Bin Khari Nimaani
Main Naini Neend Na Aavai Jiyo
Bhaavai Ann Na Paani
Mil Mere Preetma Jiyo.
Paani Ann Na Bhavai, Mariyei Haavai
Bin Pir, Kyon Sukh Paiye
Gur Aage Karau Binanti, Je Gur Bhavai
Jyon Milai Tivai Milaiyiye
Mil Mere Preetma Jiyo.
Aape Mel Laye Sukhdata
Aap Mileya Ghar Aaye
Nanak Kaaman Sada Suhagan
Na Pir Marai Na Jaye
Mil Mere Preetma Jiyo.
Mil Mere Preetama Jiyo Meaning in English
ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ ਤੁਧੁ ਬਿਨੁ ਖਰੀ ਨਿਮਾਣੀ ॥ਮੈ ਨੈਣੀ ਨੀਦ ਨ ਆਵੈ ਜੀਉ ਭਾਵੈ ਅੰਨੁ ਨ ਪਾਣੀ ॥
ਮਿਲੁ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੀਤਮਾ ਜੀਉ ਤੁਧੁ ਬਿਨੁ ਖਰੀ ਨਿਮਾਣੀ ॥ Come meet me, my beloved, without you, my life is worthless, dishonored.
ਮੈ ਨੈਣੀ ਨੀਦ ਨ ਆਵੈ ਜੀਉ ਭਾਵੈ ਅੰਨੁ ਨ ਪਾਣੀ ॥ My eyes do not close in sleep, and I have no desire for food or water without you.
ਮੈ ਨੈਣੀ ਨੀਦ ਨ ਆਵੈ ਜੀਉ ਭਾਵੈ ਅੰਨੁ ਨ ਪਾਣੀ ॥ My eyes do not close in sleep, and I have no desire for food or water without you.
Word Meaning : ਮਿਲੁ: मिलु, Milu - Meet ਮੇਰੇ: मेरे, Mere - My ਪ੍ਰੀਤਮਾ: प्रीतमा, Pritama - Beloved ਜੀਉ: जीउ, Jiu - Soul ਤੁਧੁ: तुधु, Tudhu - You ਬਿਨੁ: बिनु, Binu - Without ਖਰੀ: खरी, Kharī - True ਨਿਮਾਣੀ: निमानी, Nimānī - Humble ਮੈ: मै, Mai - I ਨੈਣੀ: नैणी, Nainī - Eyes ਨੀਦ: नीद, Nīd - Sleep ਨ ਆਵੈ: न आवै, Na āvai - Does not come ਭਾਵੈ: भावै, Bhāvai - To like ਅੰਨੁ: अंनु, Annū - Food ਨ ਪਾਣੀ: न पाणी, Na pāṇī - No water
ਪਾਣੀ ਅੰਨੁ ਨ ਭਾਵੈ ਮਰੀਐ ਹਾਵੈ ਬਿਨੁ ਪਿਰ ਕਿਉ ਸੁਖੁ ਪਾਈਐ ॥
ਗੁਰ ਆਗੈ ਕਰਉ ਬਿਨੰਤੀ ਜੇ ਗੁਰ ਭਾਵੈ ਜਿਉ ਮਿਲੈ ਤਿਵੈ ਮਿਲਾਈਐ ॥
ਪਾਣੀ ਅੰਨੁ ਨ ਭਾਵੈ ਮਰੀਐ ਹਾਵੈ ਬਿਨੁ ਪਿਰ ਕਿਉ ਸੁਖੁ ਪਾਈਐ ॥- Water and food are essential for our survival, but if one cannot enjoy them, then what is the point of living? Similarly, without the divine presence, how can one find true happiness?
ਗੁਰ ਆਗੈ ਕਰਉ ਬਿਨੰਤੀ ਜੇ ਗੁਰ ਭਾਵੈ ਜਿਉ ਮਿਲੈ ਤਿਵੈ ਮਿਲਾਈਐ ॥- I humbly request from the Guru to show me the path, and if the Guru is pleased, then I will be able to merge with the divine presence just as a river merges with the ocean.
ਗੁਰ ਆਗੈ ਕਰਉ ਬਿਨੰਤੀ ਜੇ ਗੁਰ ਭਾਵੈ ਜਿਉ ਮਿਲੈ ਤਿਵੈ ਮਿਲਾਈਐ ॥- I humbly request from the Guru to show me the path, and if the Guru is pleased, then I will be able to merge with the divine presence just as a river merges with the ocean.
word Meaning : ਪਾਣੀ: water ਅੰਨੁ: food ਨ: not ਭਾਵੈ: pleasing, agreeable ਮਰੀਐ: die ਹਾਵੈ: suffer, endure ਬਿਨੁ: without ਪਿਰ: beloved, spouse ਕਿਉ: why ਸੁਖੁ: happiness, comfort ਪਾਈਐ: obtain ਗੁਰ: Guru, spiritual teacher ਆਗੈ: before, in front of ਕਰਉ: do, make ਬਿਨੰਤੀ: humble request, supplication ਜੇ: if ਭਾਵੈ: pleases, agrees ਜਿਉ: as, like ਮਿਲੈ: meet ਤਿਵੈ: in that way, thus ਮਿਲਾਈਐ: make meet, unite
ਆਪੇ ਮੇਲਿ ਲਏ ਸੁਖਦਾਤਾ ਆਪਿ ਮਿਲਿਆ ਘਰਿ ਆਏ ॥
ਨਾਨਕ ਕਾਮਣਿ ਸਦਾ ਸੁਹਾਗਣਿ ਨਾ ਪਿਰੁ ਮਰੈ ਨ ਜਾਏ ॥
ਆਪੇ ਮੇਲਿ ਲਏ ਸੁਖਦਾਤਾ ਆਪਿ ਮਿਲਿਆ ਘਰਿ ਆਏ ॥ The divine, who is the giver of happiness, has brought me into union with himself. He himself has come to my home and merged with me.
ਨਾਨਕ ਕਾਮਣਿ ਸਦਾ ਸੁਹਾਗਣਿ ਨਾ ਪਿਰੁ ਮਰੈ ਨ ਜਾਏ ॥ Nanak says, my union with the divine is like a happy marriage that lasts forever. My love for the divine will never die, nor will I ever be separated from him.
ਨਾਨਕ ਕਾਮਣਿ ਸਦਾ ਸੁਹਾਗਣਿ ਨਾ ਪਿਰੁ ਮਰੈ ਨ ਜਾਏ ॥ Nanak says, my union with the divine is like a happy marriage that lasts forever. My love for the divine will never die, nor will I ever be separated from him.
Word Meaning : ਆਪੇ - Himself/herself/itself ਮੇਲਿ - Unite ਲਏ - Take ਸੁਖਦਾਤਾ - Giver of peace/happiness ਆਪਿ - Himself/herself/itself ਮਿਲਿਆ - Meet ਘਰਿ - Home ਆਏ - Come ਨਾਨਕ - Nanak ਕਾਮਣਿ - Beloved ਸਦਾ - Always ਸੁਹਾਗਣਿ - Married woman ਨਾ - Not ਪਿਰੁ - Husband ਮਰੈ - Dies ਨ - Not ਜਾਏ - Goes
इस शबद में जीवात्मा अपने प्रिय परमात्मा से मिलन की तीव्र इच्छा व्यक्त करती है। वह कहती है कि हे मेरे प्रिय प्रभु, मुझसे मिलो। आपके बिना मेरा जीवन सूना और दुखों से भरा हुआ है। मेरी आँखों को चैन नहीं मिलता, मन को कहीं सुख नहीं मिलता और प्रेम के बिना जीवन का कोई सहारा नहीं दिखाई देता। भोजन और पानी भी अच्छे नहीं लगते, और प्रभु-वियोग में मन व्याकुल रहता है।
जीवात्मा गुरु के आगे विनती करती है कि यदि गुरु की कृपा हो जाए, तो उसका अपने प्रभु से मिलन हो सकता है। वास्तव में परमात्मा स्वयं ही अपनी कृपा से जीव को अपने साथ जोड़ता है और उसके मन को शांति प्रदान करता है। प्रभु का मिलाप होने पर आत्मा अपने सच्चे घर अर्थात परम आनंद की अवस्था को प्राप्त कर लेती है।
शबद के अंत में गुरु नानक देव जी बताते हैं कि जो आत्मा अपने प्रभु के प्रेम में जुड़ जाती है, वह सदा आनंद में रहती है। उसका परमात्मा से कभी बिछोह नहीं होता। वह जन्म-मरण के दुखों से मुक्त होकर सदा के लिए प्रभु के चरणों में निवास करती है।
इस शबद का मुख्य संदेश यह है कि परमात्मा से बिछड़कर आत्मा दुखी रहती है, जबकि गुरु की कृपा, नाम-सिमरन और सच्ची भक्ति के द्वारा प्रभु का मिलाप प्राप्त किया जा सकता है। प्रभु-मिलन ही जीवन का सबसे बड़ा सुख और सच्चा आनंद है।
जीवात्मा गुरु के आगे विनती करती है कि यदि गुरु की कृपा हो जाए, तो उसका अपने प्रभु से मिलन हो सकता है। वास्तव में परमात्मा स्वयं ही अपनी कृपा से जीव को अपने साथ जोड़ता है और उसके मन को शांति प्रदान करता है। प्रभु का मिलाप होने पर आत्मा अपने सच्चे घर अर्थात परम आनंद की अवस्था को प्राप्त कर लेती है।
शबद के अंत में गुरु नानक देव जी बताते हैं कि जो आत्मा अपने प्रभु के प्रेम में जुड़ जाती है, वह सदा आनंद में रहती है। उसका परमात्मा से कभी बिछोह नहीं होता। वह जन्म-मरण के दुखों से मुक्त होकर सदा के लिए प्रभु के चरणों में निवास करती है।
इस शबद का मुख्य संदेश यह है कि परमात्मा से बिछड़कर आत्मा दुखी रहती है, जबकि गुरु की कृपा, नाम-सिमरन और सच्ची भक्ति के द्वारा प्रभु का मिलाप प्राप्त किया जा सकता है। प्रभु-मिलन ही जीवन का सबसे बड़ा सुख और सच्चा आनंद है।
Mil Mere Preetama Jiyo Meaning
मिल मेरे प्रीतमा जियो
तुध बिन खरी निमाणी
मैं नैणी नींद न आवै जियो,
भावै अन्न न पाणी
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
हिंदी अर्थ : मेरे स्वामी (ईश्वर) मेरे प्रियतम आप आकर मुझसे मिलो, आपके अभाव में मेरा जीवन व्यर्थ है, मेरा कोई महत्त्व नहीं है। मेरे नैनों में नींद नहीं है और अन्न जल/भोजन मुझे अच्छा नहीं लगता है।
तुध बिन खरी निमाणी
मैं नैणी नींद न आवै जियो,
भावै अन्न न पाणी
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
हिंदी अर्थ : मेरे स्वामी (ईश्वर) मेरे प्रियतम आप आकर मुझसे मिलो, आपके अभाव में मेरा जीवन व्यर्थ है, मेरा कोई महत्त्व नहीं है। मेरे नैनों में नींद नहीं है और अन्न जल/भोजन मुझे अच्छा नहीं लगता है।
पाणी अन्न न भावै, मरीअै हावै
बिन पिर क्यों सुख पाईअै
गुर आगै करौ बिनंती, जे गुर भावै
ज्यों मिलै तिवै मिलाईए
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
हिंदी अर्थ : पानी (जल) और अन्न (भोजन) मुझे भाता नहीं है, मैंने अन्न और जल का त्याग कर दिया है। बगैर प्रियतम के मुझे सुख की प्राप्ति कैसे हो सकती है।
बिन पिर क्यों सुख पाईअै
गुर आगै करौ बिनंती, जे गुर भावै
ज्यों मिलै तिवै मिलाईए
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
हिंदी अर्थ : पानी (जल) और अन्न (भोजन) मुझे भाता नहीं है, मैंने अन्न और जल का त्याग कर दिया है। बगैर प्रियतम के मुझे सुख की प्राप्ति कैसे हो सकती है।
आपे मेल लए सुखदाता
आप मिलेया घर आए
नानक कामण सदा सुहागण
ना पिर मरै न जाए
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
हिंदी अर्थ : हे ईश्वर (प्रियतम) आप मुझे अपने से मिला लीजिये, आप मुझे मिले और घर आये, सुखों के दाता ने मुझे (जीवात्मा) को स्वंय से मिला लिया है। हे नानक, ऐसी स्त्री रूपी जीवात्मा सदा ही सुहागन रहती और ना तो उसका प्रियतम कभी मरता है और ना ही विरह (बिछडाव) ही उत्पन्न होता है।
आप मिलेया घर आए
नानक कामण सदा सुहागण
ना पिर मरै न जाए
मिल मेरे प्रीतमा जियो..
हिंदी अर्थ : हे ईश्वर (प्रियतम) आप मुझे अपने से मिला लीजिये, आप मुझे मिले और घर आये, सुखों के दाता ने मुझे (जीवात्मा) को स्वंय से मिला लिया है। हे नानक, ऐसी स्त्री रूपी जीवात्मा सदा ही सुहागन रहती और ना तो उसका प्रियतम कभी मरता है और ना ही विरह (बिछडाव) ही उत्पन्न होता है।
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MIL MERE PREETMA JIYO | BHAI SURINDER SINGH (JODHPURI) | MIL MERE PREETMA JIYO
"मिल मेरे प्रीतमा जिउ" श्री गुरु अर्जन देव जी द्वारा रचित एक सुंदर शबद है। इस शबद में आत्मा की अपने प्रिय प्रभु से मिलने की गहरी चाह और तड़प का वर्णन किया गया है। प्रभु से बिछुड़कर आत्मा दुखी रहती है और उसे कहीं भी सच्चा सुख नहीं मिलता। वह गुरु से प्रार्थना करती है कि उसे ऐसा मार्ग दिखाएँ जिससे वह अपने प्रभु का मिलाप प्राप्त कर सके।
इस शबद का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य का सच्चा सुख और जीवन का वास्तविक उद्देश्य परमात्मा से जुड़ना है। गुरु की कृपा, नाम-सिमरन और भक्ति के द्वारा आत्मा प्रभु के निकट पहुँच सकती है। जब प्रभु का मिलाप हो जाता है, तब मन के सभी दुख, चिंताएँ और बेचैनियाँ समाप्त हो जाती हैं।
सिख धर्म में यह शबद विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह प्रभु-प्रेम, भक्ति और गुरु की महिमा को दर्शाता है। यह हमें याद दिलाता है कि संसार की वस्तुओं से स्थायी सुख नहीं मिलता, बल्कि सच्ची शांति और आनंद केवल प्रभु के नाम में ही प्राप्त होते हैं। जो व्यक्ति प्रेम और श्रद्धा के साथ प्रभु का स्मरण करता है, वह अंततः परम आनंद और आत्मिक शांति को प्राप्त करता है।
