जन्मे श्रीकृष्ण कन्हैया जब कारागार टूटे ताले थे

जन्मे श्री कृष्ण कन्हैया जब कारागार के टूटे ताले थे

 
जन्मे श्री कृष्ण कन्हैया जब कारागार के टूटे ताले थे

जन्मे श्रीकृष्ण कन्हैया जब,
कारागार के टूटे ताले थे,
टूटे थे भाई, टूटे थे,
कारागार के टूटे ताले थे,
सो गए थे सारे प्रहरी वो,
जो पहरा देने वाले थे,
जन्मे श्रीकृष्ण कन्हैया जब,
कारागार के टूटे ताले थे।।

भादों की अंधेरी काली रात,
घनघोर घटा ने की बरसात,
टोकरी उठा वसुदेव चले,
सोए जिसमें बंसीवाले थे,
जन्मे श्रीकृष्ण कन्हैया जब,
कारागार के टूटे ताले थे।।

जब उतरे यमुना के जल में,
लहरें थीं उठीं छूने को चरण,
वर्षा से बचाने शेषनाग,
बन छतरी छाने वाले थे,
जन्मे श्रीकृष्ण कन्हैया जब,
कारागार के टूटे ताले थे।।

यशोदा के संग बालक को लिटा,
उसकी बिटिया संग लेके चले,
फिर जल्दी लौटे जेल में वो,
होने को आए उजाले थे,
जन्मे श्रीकृष्ण कन्हैया जब,
कारागार के टूटे ताले थे।।

नंदलाला के आने की खबर,
सुन दर्शन को आए नर-नारी,
अब कंस के जीवन के सारे,
दिन पूरे होने वाले थे,
जन्मे श्रीकृष्ण कन्हैया जब,
कारागार के टूटे ताले थे।।

जन्मे श्रीकृष्ण कन्हैया जब,
कारागार के टूटे ताले थे,
टूटे थे भाई, टूटे थे,
कारागार के टूटे ताले थे,
सो गए थे सारे प्रहरी वो,
जो पहरा देने वाले थे,
जन्मे श्रीकृष्ण कन्हैया जब,
कारागार के टूटे ताले थे।।


Krishna Janmashtami 2024 - जन्मे है कृष्ण कन्हैया - Rinky Vishwakarma - Krishan ji Birthday Song

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Album - Janme Hai Krishna Kanhaiya
Song - Janme Hai Krishna Kanhaiya
Singer - Rinky vishwakarma
Music - Suraj Vishwakarma
Lyrics - Subhash Bose
Lable - Vianet media

 
कृष्ण जन्म की इस भाव संवेदना में वह पावन क्षण जीवंत हो उठता है, जब देवकी और वसुदेव की कारा की दीवारें प्रभु की लीला के आगे नतमस्तक हो जाती हैं और बंधन स्वयं टूट जाते हैं। कन्हैया के जन्म की आहट से बेड़ियाँ खुल जाती हैं, प्रहरी निद्रा में खो जाते हैं, और जेल में फैले अंधियारे को प्रभु के अवतरण से बिखरती भोर की प्रतीक्षा है। घनघोर वर्षा और भादों की रात में, शेषनाग छत्र बनकर सुरक्षा का संबल देते हैं, यमुना की लहरें चरण स्पर्श को जिज्ञासु होकर बढ़ती हैं, और वसुदेव टोकरी में बालक को ले जाते हुए अगले पड़ाव की ओर बढ़ते हैं। बालक गोपाल को नंदगांव पहुंचा, यशोदा के संग सुकून की गोद में सुलाया जाता है। जन्म की ख़बर पूरे गाँव-नगर में मंगलध्वनि और आनंद की लहर बन जाती है—यह क्षण पाप के विनाश और नूतन आशा का संदेश लेकर आता है। कंस का भय, कृष्ण की बाल लीला के आगे शिथिल पड़ने लगता है, और जनमानस प्रभु के दर्शन को उमड़ पड़ता है। जन्म के इस चमत्कार में बंधन, भय और अंधकार मिट जाते हैं, और कृष्ण की वाणी, मधुर बंसी के साथ विश्व में प्रेम, आशा और नवचेतना का आलोक फैलाती है।

Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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