ज्वाला सी जलती है देवा श्री गणेशा देवा भजन
ज्वाला सी जलती है देवा श्री गणेशा देवा भजन
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा।।
ज्वाला सी जलती है,
आंखों में जिसके भी,
दिल में तेरा नाम है,
परवाह ही क्या उसका,
आरंभ कैसा है,
और कैसा परिणाम है।
धरती, अंबर, सितारे,
उसकी नज़रे उतारे,
डर भी उससे डरा रे,
जिसकी रखवालीया रे।
करता साया तेरा,
हे देवा श्री गणेशा।।
तेरी भक्ति तो वरदान है,
जो कमाए वो धनवान है,
बिन किनारे की कश्ती है वो,
देवा तुझसे जो अनजान है।
यूँ तो मूषक सवारी तेरी,
सब पे है पहरेदारी तेरी,
पाप की आंधियां लाख हों,
कभी ज्योति ना हारी तेरी।
अपनी तक़दीर का वो,
खुद सिकंदर हुआ रे,
भूल के ये जहां रे,
जिस किसी ने यहां रे,
साथ पाया तेरा,
हे देवा श्री गणेशा।।
तेरी धूलि का टीका किए,
देवा जो भक्त तेरा जिए,
उसे अमृत का मोह क्या,
हँस के विष का प्याला पिए।
तेरी महिमा की छाया तले,
काल के रथ का पहिया चले,
एक चिंगारी प्रतिशोध से,
खड़ी रावण की लंका जले।
शत्रुओं की कतारें,
एक अकेले से हारे,
कण भी पर्वत हुआ रे,
श्लोक बन के जहां रे,
नाम आया तेरा,
हे देवा श्री गणेशा।।
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा।।
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा।।
ज्वाला सी जलती है,
आंखों में जिसके भी,
दिल में तेरा नाम है,
परवाह ही क्या उसका,
आरंभ कैसा है,
और कैसा परिणाम है।
धरती, अंबर, सितारे,
उसकी नज़रे उतारे,
डर भी उससे डरा रे,
जिसकी रखवालीया रे।
करता साया तेरा,
हे देवा श्री गणेशा।।
तेरी भक्ति तो वरदान है,
जो कमाए वो धनवान है,
बिन किनारे की कश्ती है वो,
देवा तुझसे जो अनजान है।
यूँ तो मूषक सवारी तेरी,
सब पे है पहरेदारी तेरी,
पाप की आंधियां लाख हों,
कभी ज्योति ना हारी तेरी।
अपनी तक़दीर का वो,
खुद सिकंदर हुआ रे,
भूल के ये जहां रे,
जिस किसी ने यहां रे,
साथ पाया तेरा,
हे देवा श्री गणेशा।।
तेरी धूलि का टीका किए,
देवा जो भक्त तेरा जिए,
उसे अमृत का मोह क्या,
हँस के विष का प्याला पिए।
तेरी महिमा की छाया तले,
काल के रथ का पहिया चले,
एक चिंगारी प्रतिशोध से,
खड़ी रावण की लंका जले।
शत्रुओं की कतारें,
एक अकेले से हारे,
कण भी पर्वत हुआ रे,
श्लोक बन के जहां रे,
नाम आया तेरा,
हे देवा श्री गणेशा।।
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा,
देवा श्री गणेशा, देवा श्री गणेशा।।
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Author - Saroj Jangir
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