चाली जीण बनी में आई सामो मिलगो हर्षो भाई
चाली जीण बनी में आई सामो मिलगो हर्षो भाई
जीण चली गई रूठ के,
मन में रंज मलाल,
हर्षो करें मनावणा,
बाई जीण घरा ने चाल।।
चाली जीण बनी में आई,
सामो मिलग्यो हर्षो भाई,
क्यों घर छोड़ चली मां जाई,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
वीरा वक्त इसो ही आयो,
घर में रहणो नहीं सुहायो,
महासूं जावे नहीं बतायो,
बीरा म्हारा रे, बीरा म्हारा रे।
म्हाने साची साच बताओ,
दुख बीर से नहीं छुपाओ,
थारो मन को रोष मिटाओ,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
भावज खोटी घणी सुनाई,
लाग्यो तीर कलेजा माही,
तानों सहन नहीं कर पाई,
बीरा म्हारा रे, बीरा म्हारा रे।
थारी भावजड़ी ने चाल,
घरासूं कडूगो तत्काल,
इममें नहीं करूं टाल,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
वीरा माने घर नहीं जानो,
घर में रहणो भयो पुराणो,
अब तो बनखंड ही घर मानो,
बीरा म्हारा रे, बीरा म्हारा रे।
म्हारी गलती सभी भुला दे,
मारे मनडे धीर बंधा दे,
आज बीरा को मान रखादे,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
वीरा हुकम दियो मां शक्ति,
अठे ही करूं दुर्गा की भक्ति,
भूल जाजो भावज की गलती,
बीरा म्हारा रे, बीरा म्हारा रे।
ओम जद हर्षवीर हरसाय,
बोल्यो बहना नेम निभाय,
मैं भी भक्ति करूं वन माय,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
चाली जीण बनी में आई,
सामो मिलग्यो हर्षो भाई,
क्यों घर छोड़ चली मां जाई,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
मन में रंज मलाल,
हर्षो करें मनावणा,
बाई जीण घरा ने चाल।।
चाली जीण बनी में आई,
सामो मिलग्यो हर्षो भाई,
क्यों घर छोड़ चली मां जाई,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
वीरा वक्त इसो ही आयो,
घर में रहणो नहीं सुहायो,
महासूं जावे नहीं बतायो,
बीरा म्हारा रे, बीरा म्हारा रे।
म्हाने साची साच बताओ,
दुख बीर से नहीं छुपाओ,
थारो मन को रोष मिटाओ,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
भावज खोटी घणी सुनाई,
लाग्यो तीर कलेजा माही,
तानों सहन नहीं कर पाई,
बीरा म्हारा रे, बीरा म्हारा रे।
थारी भावजड़ी ने चाल,
घरासूं कडूगो तत्काल,
इममें नहीं करूं टाल,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
वीरा माने घर नहीं जानो,
घर में रहणो भयो पुराणो,
अब तो बनखंड ही घर मानो,
बीरा म्हारा रे, बीरा म्हारा रे।
म्हारी गलती सभी भुला दे,
मारे मनडे धीर बंधा दे,
आज बीरा को मान रखादे,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
वीरा हुकम दियो मां शक्ति,
अठे ही करूं दुर्गा की भक्ति,
भूल जाजो भावज की गलती,
बीरा म्हारा रे, बीरा म्हारा रे।
ओम जद हर्षवीर हरसाय,
बोल्यो बहना नेम निभाय,
मैं भी भक्ति करूं वन माय,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
चाली जीण बनी में आई,
सामो मिलग्यो हर्षो भाई,
क्यों घर छोड़ चली मां जाई,
बहना म्हारी है, बहना म्हारी है।।
जीण चली गई रूठ के, मन मे रंज मलाल || Jeen Chali Gai Ruth Ke, Man Me Ranj Malal || जीण माता भजन व कथा
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Author - Saroj Jangir
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