ओ गणेश राजा आजा धूम मची है

ओ गणेश राजा आजा धूम मची है

(मुखड़ा)
ओ गणेश राजा आजा,
धूम मची है,
धूम मची है रे बड़ी,
धूम मची है,
धूम मची है रे बड़ी,
धूम मची है।।

(अंतरा)
माता गौरा को संग लेकर के आना,
भक्तों को आशीष देकर के जाना,
खजाने में तेरे नहीं कोई कमी है,
धूम मची है रे बड़ी,
धूम मची है।।

हमने बनाई है तेरे लिए पालकी,
बोल रहे हैं सब जय पार्वती के लाल की,
पालकी भी आज यहां खूब सजी है,
धूम मची है रे बड़ी,
धूम मची है।।

(पुनरावृति)
ओ गणेश राजा आजा,
धूम मची है,
धूम मची है रे बड़ी,
धूम मची है,
धूम मची है रे बड़ी,
धूम मची है।।


हे गणेश राजा बड़ी धूम मची है रे बड़ी धूम मची है

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गणेश राजा, माता गौरा के लाल, का आगमन भक्तों के लिए उत्सव और आनंद का कारण है, जो उनके स्वागत में धूमधाम से सजा हुआ है। भक्तों ने उनके लिए पालकी सजाई है, और उनके जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है। माता गौरा के साथ उनकी उपस्थिति भक्तों के हृदय को आशीर्वाद और प्रेम से भर देती है, क्योंकि उनके खजाने में कृपा और सुख की कोई कमी नहीं है। यह वह पवित्र क्षण है, जब भक्त अपने प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा में श्रद्धा और उत्साह से एकत्र होते हैं, और उनकी कृपादृष्टि से हर मनोकामना पूर्ण होने की आशा रखते हैं।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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