हमारा मन राधा ले गई रे भजन

हमारा मन राधा ले गई रे भजन

 
हमारा मन राधा ले गई रे भजन

(मुखड़ा)
हमारा मन राधा ले गई रे,
राधा ले गई, राधा ले गई,
राधा ले गई रे,
हमारो मन राधा ले गई रे।।

(अंतरा)

गहरी गहरी वन की छाया,
वहां पर चर रही मेरी गाय,
नैनों के वो तीर चला के,
नैनों के वो तीर चला के,
घायल कर गई रे,
हमारो मन राधा ले गई रे।।

मधुबन में मैं गाय चराऊं,
मीठी मीठी बंसी बजाऊं,
बरसाने की चतुर गुजरिया,
बरसाने की चतुर गुजरिया,
दिल में उतर गई रे,
हमारो मन राधा ले गई रे।।

मैं भोला वो चतुर गुजरिया,
एक दिन मेरी पकड़ी उंगलियां,
बातों ही बातों में बंसी,
बातों ही बातों में बंसी,
लेके खिसक गई रे,
हमारो मन राधा ले गई रे।।

मैया में बरसाने जाऊं,
वहां से अपनी बंसी लाऊं,
बंसी के बिना गाय मेरी,
बंसी के बिना गाय मेरी,
यहां वहां भागे रे,
हमारो मन राधा ले गई रे।।

राधा के बिना चैन न पाऊं,
बंसी में मैं राधे राधे गाऊं,
बनवारी कहे हाथ जोड़ के,
बनवारी कहे हाथ जोड़ के,
हृदय में बस गई रे,
हमारो मन राधा ले गई रे।।

(पुनरावृति)
हमारा मन राधा ले गई रे,
राधा ले गई, राधा ले गई,
राधा ले गई रे,
हमारो मन राधा ले गई रे।।


कृष्ण भजन | हमारो मन राधा ले गई रे || Hamara mann radha le gai re

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Title - Hamara mann radha le gai re
Artist - Vanshika Sharma
Singer - Aarti
Banjo / Keyboard - Naresh Pahal
 
वन की गहरी छांव में, जहां गायें चरती हैं और प्रकृति का सौंदर्य अपने पूर्ण रूप में खिलता है, वहां एक ऐसी उपस्थिति है जो मन को मोह लेती है। यह वह चतुराई और प्रेम भरी शक्ति है, जो अपनी नयन भेदी नजरों से हृदय को घायल कर देती है। यह प्रेम का तीर नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है जो आत्मा को छू लेती है, उसे अपने रंग में रंग देती है। मधुबन की उस शांत और मधुर वादियों में, जहां बंसी की मधुर धुन गूंजती है, वहां एक ऐसी चंचलता और भक्ति का मेल होता है जो हर प्राणी को अपनी ओर खींच लेता है। यह वह प्रेम है जो सरलता और चतुराई के बीच एक अनोखा संतुलन बनाता है।

यह प्रेममयी उपस्थिति केवल हृदय को ही नहीं चुराती, बल्कि जीवन की हर धुन को अपने राग में ढाल देती है। वह चतुर गुजरिया, जो बातों ही बातों में बंसी ले उड़ती है, वास्तव में आत्मा को भक्ति के मार्ग पर ले जाती है। बंसी के बिना मन और जीवन अधूरा सा लगता है, जैसे गायें बिना चरवाहे के भटकती हैं। वह प्रेम, जो बरसाने की गलियों से आता है, हृदय में इस तरह बस जाता है कि हर सांस, हर धड़कन उसी के नाम से गूंजने लगती है। यह वह भक्ति है जो हर पल राधे-राधे का जाप बन जाती है, जो मन को शांति देती है और आत्मा को उस परम सत्ता के करीब ले जाती है। यह प्रेम और भक्ति का ऐसा बंधन है जो कभी टूटता नहीं, बल्कि हर क्षण को और भी अर्थपूर्ण बना देता है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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