अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक भजन
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक भजन
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए,
इन अँखियों की डिब्बियों के ढक्कन टूट-टूट गिर जाए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
वो शरीर ही किस काम का, जो नाम न ले श्याम का,
मन मंदिर में सदा बसा हो, रूप तुम्हारा प्यारे सांवरा,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
बार-बार ढक्कन गिरते हैं कान्हा,
परेशान दिल को करते हैं कान्हा,
डर लगता है पलक झपकते — श्याम कहीं चल न जाए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
रखो ये नैना तब तक मिलाए,
बांकी छवि ना इनमें समाए,
सुना है इन नैनों के ज़रिए, दिल से दिल टकराए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
खुले रहें हरदम ढक्कन हमारे,
ना हो क्षणभर भी बंद किनारे,
चाहे अखियाँ फूट जाएं — पर ऐसा दिन न आए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
बनवारी! नैना मिलाते-मिलाते,
सूरत तेरी समाते-समाते,
ऐसे लगें जो कभी न गिरें वो ढक्कन बन जाएं,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
इन अँखियों की डिब्बियों के ढक्कन टूट-टूट गिर जाए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
वो शरीर ही किस काम का, जो नाम न ले श्याम का,
मन मंदिर में सदा बसा हो, रूप तुम्हारा प्यारे सांवरा,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
बार-बार ढक्कन गिरते हैं कान्हा,
परेशान दिल को करते हैं कान्हा,
डर लगता है पलक झपकते — श्याम कहीं चल न जाए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
रखो ये नैना तब तक मिलाए,
बांकी छवि ना इनमें समाए,
सुना है इन नैनों के ज़रिए, दिल से दिल टकराए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
खुले रहें हरदम ढक्कन हमारे,
ना हो क्षणभर भी बंद किनारे,
चाहे अखियाँ फूट जाएं — पर ऐसा दिन न आए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
बनवारी! नैना मिलाते-मिलाते,
सूरत तेरी समाते-समाते,
ऐसे लगें जो कभी न गिरें वो ढक्कन बन जाएं,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक झपकाये || Jai Shankar Chaudhary || Best Krishna Bhajan 2022
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इस भाव में श्याम कन्हैया (कृष्ण) के दर्शन की तीव्र लालसा और उनके रूप में डूब जाने की उत्कट इच्छा व्यक्त की गई है। मन की यह अवस्था है कि आंखें एक पल के लिए भी झपकना नहीं चाहतीं, क्योंकि डर है कि कहीं श्याम की छवि ओझल न हो जाए। यह प्रेम और भक्ति की चरम अवस्था है, जिसमें भक्त अपने श्याम कन्हैया को निरंतर निहारना चाहता है, और आंखों की पलकें बार-बार गिरने से भी परेशान हो जाता है। भजन के शब्दों में यह भाव है कि "इन अँखियों की डिब्बियों के ढक्कन टूट-टूट गिर जाएं," ताकि श्याम के दर्शन में कभी कोई बाधा न आए। मन में यही कामना है कि श्याम का रूप सदा आंखों के सामने बना रहे, और उनका सौंदर्य, उनका सांवला रूप, मन-मंदिर में हमेशा बसा रहे।
Album :- अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक झपकाये
Bhajan :- Apne Shyam Kanhaiya Ko Dekhu Bina Palak Jhapkaye
Singer :- Jai Shankar Chaudhary
Copyright :- Skylark Infotainment
Vendor :- A2z Music Media.
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इस भाव में श्याम कन्हैया (कृष्ण) के दर्शन की तीव्र लालसा और उनके रूप में डूब जाने की उत्कट इच्छा व्यक्त की गई है। मन की यह अवस्था है कि आंखें एक पल के लिए भी झपकना नहीं चाहतीं, क्योंकि डर है कि कहीं श्याम की छवि ओझल न हो जाए। यह प्रेम और भक्ति की चरम अवस्था है, जिसमें भक्त अपने श्याम कन्हैया को निरंतर निहारना चाहता है, और आंखों की पलकें बार-बार गिरने से भी परेशान हो जाता है। भजन के शब्दों में यह भाव है कि "इन अँखियों की डिब्बियों के ढक्कन टूट-टूट गिर जाएं," ताकि श्याम के दर्शन में कभी कोई बाधा न आए। मन में यही कामना है कि श्याम का रूप सदा आंखों के सामने बना रहे, और उनका सौंदर्य, उनका सांवला रूप, मन-मंदिर में हमेशा बसा रहे।
Album :- अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक झपकाये
Bhajan :- Apne Shyam Kanhaiya Ko Dekhu Bina Palak Jhapkaye
Singer :- Jai Shankar Chaudhary
Copyright :- Skylark Infotainment
Vendor :- A2z Music Media.
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Author - Saroj Jangir
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