अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक

अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक


अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए,
इन अँखियों की डिब्बियों के ढक्कन टूट-टूट गिर जाए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।

वो शरीर ही किस काम का, जो नाम न ले श्याम का,
मन मंदिर में सदा बसा हो, रूप तुम्हारा प्यारे सांवरा,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।

बार-बार ढक्कन गिरते हैं कान्हा,
परेशान दिल को करते हैं कान्हा,
डर लगता है पलक झपकते — श्याम कहीं चल न जाए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।

रखो ये नैना तब तक मिलाए,
बांकी छवि ना इनमें समाए,
सुना है इन नैनों के ज़रिए, दिल से दिल टकराए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।

खुले रहें हरदम ढक्कन हमारे,
ना हो क्षणभर भी बंद किनारे,
चाहे अखियाँ फूट जाएं — पर ऐसा दिन न आए,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।

बनवारी! नैना मिलाते-मिलाते,
सूरत तेरी समाते-समाते,
ऐसे लगें जो कभी न गिरें वो ढक्कन बन जाएं,
अपने श्याम कन्हैया को देखूँ, बिना पलक झपकाए।


अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक झपकाये || Jai Shankar Chaudhary || Best Krishna Bhajan 2022

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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