हमके गोकुल अउर बरसाना ब्रज चाही

हमके गोकुल अउर बरसाना ब्रज चाही


हमके गोकुल अउर बरसाना ब्रज चाही
जउन भुइयाँ में लोटें, ओह रज चाही।
हमके दयालु, दया बस तोहार चाही,
मन में सत्संग, कीर्तन अउर प्यार चाही॥

जब चरण-ग्राह धई के पछारे रहल,
"कृष्ण-गोविन्द" कहिके गज पुकारे रहल।
सारी ताकत लगवले, बिबस हारे रहल,
त्याग के सबके, तोहरे सहारे रहल,
नाथ! गजराज वाली समुझ चाही॥

जे प्रभु नारि गौतम के तारे रहलें,
सुर-नर, मुनि, नाग, किन्नर के प्यारे रहलें।
राजा मिथिला के बगिया पधारे रहलें,
जे के मलि-मलि के केवट पखारे रहलें,
उहे कोमल चरणन के रज चाही॥

जेकर कृपा कोर से भव फाँसी छूटे,
जेकर बल से तन-प्राण काशी में छूटे।
भक्तन के चिंता, उदासी सब छूटे,
राम! तोहर दया से भव फाँसी छूटे,
ऐसन अर्जी, अदालत अउर जज चाही॥


हमके गोकुल बरसाना ब्रज चाही | Hamke Gokul Barsana Braj Chahi | New Bhojpuri Krishna Bhajan

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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