जात पात के छुरा गा भईया तोर आजादी हवय गा अधूरा

जात पात के छुरा गा भईया तोर आजादी हवय गा अधूरा

जब तक चलही जाति-पाँति के छुरा,
गा भईया, तोर आज़ादी हवय गा अधूरा।

रे भईया, तोर आज़ादी हवय गा अधूरा,
रे संगी, तोर आज़ादी हवय गा अधूरा।।

संग म खावय अउ सुतावय, जेन मनखे ह कुकुर ला,
जेन मनखे ह कुकुर ला संगी,
उही मनखे ह मनखे के संग करत हवय दूर छुरा,
करत हवय दूर छुरा रे संगी,
कतको पापी, पाखंडी हे पूरा...
गा भईया, तोर आज़ादी हवय गा अधूरा।।

हमन तो जनमे हन जी, महतारी के गर्भ ले,
महतारी के गर्भ ले रे संगी,
छूवा मनईया मनखे मन, गा उतरे हे सीधा सरग ले,
का उतरे हे सरग ले रे संगी,
सच्चा बात ह लागे ओला बुरा...
गा भईया, तोर आज़ादी हवय गा अधूरा।।

जब तक चलही जाति-पाँति के छुरा,
गा भईया, तोर आज़ादी हवय गा अधूरा।।


जात पात के छुरा jat Pat ke chhura- gorelal barman

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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