जीवन का क्या ठिकाना कर ले जतन भजन

जीवन का क्या ठिकाना कर ले जतन भजन

जीवन का क्या ठिकाना,
कर ले जतन मेरे मनवा,
एक रोज हमको जाना,
जीवन का क्या ठिकाना।।

जीवन है एक सराय,
एक आए, एक जाए,
करके विचार देखो,
दुनिया में हम क्यों आए,
भज ले हरि को वरना,
यमलोक होगा जाना,
यमलोक होगा जाना,
जीवन का क्या ठिकाना।।

जग में मजे उड़ाने,
को तन नहीं मिला है,
मुरझाएगा ये एक दिन,
ये बाग जो खिला है,
जीवन कई मिलेंगे,
मुश्किल है तन ये पाना,
मुश्किल है तन ये पाना,
जीवन का क्या ठिकाना।।

भज ले हरि को मनवा,
चाहे ये जिंदगी,
कर अब न आनाकानी,
ओ मनवा अभिमानी,
गुरु जो बताई रास्ता,
उस पर तू चलते जाना,
उस पर तू चलते जाना,
जीवन का क्या ठिकाना।।

जीवन का क्या ठिकाना,
कर ले जतन मेरे मनवा,
एक रोज हमको जाना,
जीवन का क्या ठिकाना।।



जीवन का क्या ठिकाना माया है आनी जानी अभिमान नहीं करना थोड़ीसी जिंदगानी!चंद्रभूषण पाठक भजन

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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