विनती सुनिए नाथ हमारी हृदय स्वर हरी हृदय बिहारी

विनती सुनिए नाथ हमारी हृदय स्वर हरी हृदय बिहारी


विनती सुनिए नाथ हमारी
हृदय स्वर हरी, हृदय बिहारी
मोर मुकुट पीतांबरधारी
विनती सुनिए नाथ हमारी

जनम-जनम की लगी लगन है
साक्षी तारों भरा गगन है
गिन-गिन सांसें आस कहती हैं
आएंगे श्रीकृष्ण मुरारी
विनती सुनिए नाथ हमारी

सतत प्रतीक्षा, अपलक लोचन
हे भव-बाधा, विपत्ति-विमोचन
स्वागत का अधिकार दीजिए
शरणागत हैं नयन पुजारी
विनती सुनिए नाथ हमारी

और कहूं क्या, अंतर्यामी
तन-मन-धन, प्राणों के स्वामी
करुणाकर आकर ये कहिए
स्वीकारी विनती, स्वीकारी
विनती सुनिए नाथ हमारी


Vinti He Nath | विनती हे नाथ | जगतदाता श्री कृष्ण भगवान से करुणामयी विनती | by Krishna Agarwal

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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