दुनिया से अलग है न्यारा है साईं तेरा मेरा नाता
दुनिया से अलग है न्यारा है साईं तेरा मेरा नाता
दिल में साईं, मंदिर तेरा,
तू है प्यारा सतगुरु मेरा।
दुनिया से अलग है न्यारा,
है साईं तेरा मेरा नाता।।
क्या बोलूं अपनी जुबान से मैं,
तू अंतर्यामी है दाता,
दिल से दिल का रिश्ता क्या है,
लफ्ज़ों में बताना मुश्किल है,
अपने एहसास का,
दुनिया को एहसास कराना मुश्किल है,
पूछे जो कोई, बतलाऊं क्या,
जग को मैं नहीं समझा पाता।
दुनिया से अलग है न्यारा,
है साईं तेरा मेरा नाता।।
संतान नहीं साईं मैं तेरी,
पर प्यार है तेरा वैसा ही,
ममता है तेरी माँ के जैसी,
व्यवहार पिता के जैसा ही।
सुख हो, दुःख हो तेरे होते,
मन बिल्कुल भी नहीं घबराता।
दुनिया से अलग है न्यारा,
है साईं तेरा मेरा नाता।।
नज़दीक सदा रहना साईं,
दूरी नहीं तेरी सह सकता,
हर इक सितम सह सकता हूँ,
नहीं तेरी जुदाई सह सकता।
जज़्बा ये तेरा नज़दीकी का,
साहिल के दिल को है धड़काता।
दुनिया से अलग है न्यारा,
है साईं तेरा मेरा नाता।।
तू है प्यारा सतगुरु मेरा।
दुनिया से अलग है न्यारा,
है साईं तेरा मेरा नाता।।
क्या बोलूं अपनी जुबान से मैं,
तू अंतर्यामी है दाता,
दिल से दिल का रिश्ता क्या है,
लफ्ज़ों में बताना मुश्किल है,
अपने एहसास का,
दुनिया को एहसास कराना मुश्किल है,
पूछे जो कोई, बतलाऊं क्या,
जग को मैं नहीं समझा पाता।
दुनिया से अलग है न्यारा,
है साईं तेरा मेरा नाता।।
संतान नहीं साईं मैं तेरी,
पर प्यार है तेरा वैसा ही,
ममता है तेरी माँ के जैसी,
व्यवहार पिता के जैसा ही।
सुख हो, दुःख हो तेरे होते,
मन बिल्कुल भी नहीं घबराता।
दुनिया से अलग है न्यारा,
है साईं तेरा मेरा नाता।।
नज़दीक सदा रहना साईं,
दूरी नहीं तेरी सह सकता,
हर इक सितम सह सकता हूँ,
नहीं तेरी जुदाई सह सकता।
जज़्बा ये तेरा नज़दीकी का,
साहिल के दिल को है धड़काता।
दुनिया से अलग है न्यारा,
है साईं तेरा मेरा नाता।।
साईं सतगुरु Sai Satguru I PRAVEEN MOUDGIL I Sai Bhajan I Full Audio Song
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Sai Bhajan: Sai Satguru
Singer: Praveen Moudgil
Music Director: Amar Haldipur
Lyricist: Pradeep Sahil
Album: Sai Satguru
Singer: Praveen Moudgil
Music Director: Amar Haldipur
Lyricist: Pradeep Sahil
Album: Sai Satguru
उस परम शक्ति के साथ हृदय का रिश्ता इतना गहरा और अनूठा है कि उसे शब्दों में बयान करना असंभव-सा प्रतीत होता है। वह शक्ति हृदय में एक मंदिर की तरह विराजमान है, जो हर सांस को प्रेम और विश्वास से जोड़ती है। यह नाता सांसारिक बंधनों से परे है, जो न केवल आत्मा को शांति देता है, बल्कि उसे उस अंतर्यामी सत्य से जोड़ता है, जो हर प्राणी के भीतर निवास करता है। इस प्रेम को दुनिया के सामने व्यक्त करना कठिन है, क्योंकि यह एहसास इतना गहन है कि उसे शब्दों में समेटना संभव नहीं।
वह शक्ति माँ की ममता और पिता के व्यवहार की तरह हर परिस्थिति में साथ देती है। सुख हो या दुख, उसका साथ मन को कभी विचलित नहीं होने देता। उसकी कृपा ऐसी है कि वह अपने प्रेम से हर प्राणी को अपने जैसा ही अपनाती है, और उसे सदा अपने करीब रखती है। यह नजदीकी का जज्बा हृदय को धड़कन देता है, और उसे हर सितम को सहने की शक्ति प्रदान करता है। उस शक्ति से जुदाई का विचार भी असहनीय है, क्योंकि उसका प्रेम ही जीवन का आधार है।
वह शक्ति माँ की ममता और पिता के व्यवहार की तरह हर परिस्थिति में साथ देती है। सुख हो या दुख, उसका साथ मन को कभी विचलित नहीं होने देता। उसकी कृपा ऐसी है कि वह अपने प्रेम से हर प्राणी को अपने जैसा ही अपनाती है, और उसे सदा अपने करीब रखती है। यह नजदीकी का जज्बा हृदय को धड़कन देता है, और उसे हर सितम को सहने की शक्ति प्रदान करता है। उस शक्ति से जुदाई का विचार भी असहनीय है, क्योंकि उसका प्रेम ही जीवन का आधार है।
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Author - Saroj Jangir
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