मैं जोगनिया साईं राम की भजन
मैं जोगनिया साईं राम की भजन
(मुखड़ा)
मैं जोगनिया साईं राम की,
फिक्र नहीं है सुबहो शाम की,
जपू मैं माला साईं राम की,
मैं जोगनिया साईं राम की।।
(अंतरा 1)
साईं संध्या में जब आऊं,
सबसे पहले जोत जगाऊं,
नतमस्तक फिर मैं हो जाऊं,
साईं चरणों में फूल चढ़ाऊं।
चिंता नहीं है किसी काम की,
जपू मैं माला साईं राम की,
मैं जोगनिया साईं राम की।।
(अंतरा 2)
साईं की धुन में रम जाती हूं,
साईं आरती करवाती हूं,
मन की मुरादें जब पाती हूं,
साईं संध्या करवाती हूं।
लगन है मुझको शिरडी धाम की,
जपू मैं माला साईं राम की,
मैं जोगनिया साईं राम की।।
(अंतरा 3)
साईं लगन में लग जाती हूं,
नीर नयन से बरसाती हूं,
शिरडी जब भी मैं जाती हूं,
साईं का दर्शन कर आती हूं।
छवि है जिनमें राधे श्याम की,
जपू मैं माला साईं राम की,
मैं जोगनिया साईं राम की।।
(अंतरा 4)
साईं का रंग ऐसा भाया,
सोनू ने तन मन को रगड़ाया,
बाबा ने मुझको अपना बना के,
मेरे मन का फूल खिलाया।
याद करूं मैं मुक्ति धाम की,
जपू मैं माला साईं राम की,
मैं जोगनिया साईं राम की।।
मैं जोगनिया साईं राम की,
फिक्र नहीं है सुबहो शाम की,
जपू मैं माला साईं राम की,
मैं जोगनिया साईं राम की।।
(अंतरा 1)
साईं संध्या में जब आऊं,
सबसे पहले जोत जगाऊं,
नतमस्तक फिर मैं हो जाऊं,
साईं चरणों में फूल चढ़ाऊं।
चिंता नहीं है किसी काम की,
जपू मैं माला साईं राम की,
मैं जोगनिया साईं राम की।।
(अंतरा 2)
साईं की धुन में रम जाती हूं,
साईं आरती करवाती हूं,
मन की मुरादें जब पाती हूं,
साईं संध्या करवाती हूं।
लगन है मुझको शिरडी धाम की,
जपू मैं माला साईं राम की,
मैं जोगनिया साईं राम की।।
(अंतरा 3)
साईं लगन में लग जाती हूं,
नीर नयन से बरसाती हूं,
शिरडी जब भी मैं जाती हूं,
साईं का दर्शन कर आती हूं।
छवि है जिनमें राधे श्याम की,
जपू मैं माला साईं राम की,
मैं जोगनिया साईं राम की।।
(अंतरा 4)
साईं का रंग ऐसा भाया,
सोनू ने तन मन को रगड़ाया,
बाबा ने मुझको अपना बना के,
मेरे मन का फूल खिलाया।
याद करूं मैं मुक्ति धाम की,
जपू मैं माला साईं राम की,
मैं जोगनिया साईं राम की।।
Joganiya Sai Ram Ki
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Joganiya Sai Ram Ki · Sonu Daas
Joganiya Sai Ram Ki
℗ JMD Enterprises
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साईं राम की भक्ति वह पवित्र ज्योति है, जो भक्त के जीवन को सुबह-शाम आलोकित करती है। उनकी शरण में आने वाला भक्त, जैसे कोई जोगनिया, सारी सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर उनके चरणों में नतमस्तक होता है। साईं की संध्या में जोत जगाकर, फूल चढ़ाकर और उनकी आरती उतारकर भक्त का मन उनकी धुन में रम जाता है। शिरडी धाम की लगन भक्त के हृदय को प्रेम और श्रद्धा से भर देती है, और साईं के दर्शन से उसकी सारी मुरादें पूर्ण हो जाती हैं। यह भक्ति का वह भाव है, जो भक्त को साईं के प्रेम में डुबो देता है और जीवन को मंगलमय बनाता है।
‘सोनू’ जैसे भक्त साईं राम के रंग में इस कदर रंग जाते हैं कि उनका तन-मन उनके प्रेम में समर्पित हो जाता है। साईं की कृपा से भक्त का मन फूल-सा खिल उठता है, और उनकी छवि में राधे-श्याम का दर्शन होता है। शिरडी का वह पवित्र धाम, जहां साईं का आशीर्वाद बरसता है, भक्त को मुक्ति का मार्ग दिखाता है। साईं की माला जपने वाला भक्त सारी सांसारिक माया से परे होकर उनके प्रेम में लीन रहता है, और उनकी कृपादृष्टि से जीवन का हर पल भक्ति और आनंद से परिपूर्ण हो जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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