आई जगराते की रात मैं चुनर ओढ़ भजन

आई जगराते की रात मैं चुनर ओढ़ के नाचूंगी भजन


ओढ़ के नाचूँगी,
मैं चुनर ओढ़ के नाचूँगी,
आई जगराते की रात,
मैं चुनर ओढ़ के नाचूँगी।

कलश धराया है अँगने में,
चौक पुराया है,
मेरी माँ का है नवरात,
मैं चुनर ओढ़ के नाचूँगी,
आई जगराते की रात,
मैं चुनर ओढ़ के नाचूँगी।

लाल चुनरिया लाई हूँ,
पंडाल सजाया है,
भक्ति में किया करामात,
मैं चुनर ओढ़ के नाचूँगी,
आई जगराते की रात,
मैं चुनर ओढ़ के नाचूँगी।

लाज का बंधन तोड़ दिया,
ममता की छाँव में,
हुई खुशियों की बरसात,
मैं घूँघट ओढ़ के नाचूँगी,
आई जगराते की रात,
मैं चुनर ओढ़ के नाचूँगी।

ओढ़ के नाचूँगी,
मैं चुनर ओढ़ के नाचूँगी,
आई जगराते की रात,
मैं चुनर ओढ़ के नाचूँगी।


माता भजन - आई जगराते की रात | Dimpal Bhumi Bhajan | Maiya Bhajan | Devi Bhajan | Mata Bhajan Song

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यह भाव भक्त की मनोस्थिति को दर्शाता है, जिसमें वह उत्सव और भक्ति के वातावरण में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ चुनर ओढ़कर नाचने का संकल्प करता है। यह नाचना, चुनर ओढ़कर, जगराते की रातों में माँ की भक्ति में डूब जाने का प्रतीक है। जीवन की हर चिंता, लज्जा और बाधा को त्यागकर भक्त निरंतर माँ की पूजा और सेवा में समर्पित हो जाता है। चुनर का रंग और सजावट भक्ति की गहराई और उत्साह को दर्शाता है, जिसमें भक्त माँ के प्रति अपनी पूर्ण भक्ति और प्रेम प्रकट करता है। यह भक्ति उत्सव जीवन में खुशियों, उल्लास और आध्यात्मिक आनंद का संचार करती है।
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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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