मेरे बालाजी बलकारी ने शंकर के अवतारी
मेरे बालाजी बलकारी ने शंकर के अवतारी
मेरे बालाजी बलकारी ने,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
सुपने में महां दिए दिखाई,
न्यूँ कहें अंजनी लाला जी,
"आज्या भक्त तेरे ठाठ करूं,
खोलूं किस्मत का ताला जी।"
पूजूं संकटहारी ने,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
राम धुणी बजरंगी के महां,
और चलती चालीसा,
भजन-रंग मस्त कर दे,
तन-मन में घळ-झळ घी-सा।
नौकरी सरकारी में,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
घर के ऊपर ध्वजा लहरावे,
रोग-दोष भी दूर भगावे,
गलती त कोई आ भी जावे,
ऐसा यो मजबूर करावे।
आज बना दिया पुजारी मैं,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
गाम समाल में कप्तान शर्मा,
जोत जगावे बाबा की,
नरेंद्र कौशिक करै जागरण,
महिमा गावै बाबा की।
ढाल दिया लहकारी में,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
मेरे बालाजी बलकारी ने,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
सुपने में महां दिए दिखाई,
न्यूँ कहें अंजनी लाला जी,
"आज्या भक्त तेरे ठाठ करूं,
खोलूं किस्मत का ताला जी।"
पूजूं संकटहारी ने,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
राम धुणी बजरंगी के महां,
और चलती चालीसा,
भजन-रंग मस्त कर दे,
तन-मन में घळ-झळ घी-सा।
नौकरी सरकारी में,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
घर के ऊपर ध्वजा लहरावे,
रोग-दोष भी दूर भगावे,
गलती त कोई आ भी जावे,
ऐसा यो मजबूर करावे।
आज बना दिया पुजारी मैं,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
गाम समाल में कप्तान शर्मा,
जोत जगावे बाबा की,
नरेंद्र कौशिक करै जागरण,
महिमा गावै बाबा की।
ढाल दिया लहकारी में,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
मेरे बालाजी बलकारी ने,
शंकर के अवतारी ने,
दो-दो कोठी बनवा दी,
मैं घूमूं रोज सफारी में,
मेरे बालाजी बलकारी ने।।
मेरे बालाजी बलकारी ने, शंकर के अवतारी ने
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Admin - Saroj Jangir
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