आयो कहाँ से घनश्याम रैना बिताई भजन
आयो कहाँ से घनश्याम रैना बिताई किस धाम
आ आ आ रे …
आयो कहाँ से घनश्याम॥
रैना बिताई किस धाम ॥
हाय राम
आयो कहाँ से …
हाँ रात की जागी रे ॥
अँखियाँ हैं तोरी
रात की जागी रे अँखियाँ हैं तोरी
हो रही गली गली जिया की चोरी ॥
हो नहीं जाना बदनाम हाय राम
आयो कहाँ से …
सज धज तुमरी का कहूँ रसिया
धनिध ध
धनिध ध
मधप गपम रेमग
मगस निस निस निसगमग
सगम पनिगम
पनिस गमगसा निनिप मगस प
सज धज तुमरी का कहूँ रसिया
ऐसे लगे तेरे हाथों में बँसिया ॥
जैसे कटारी लियो थाम हाय राम ॥
आयो कहाँ से …
हाँ मैं ना कहूँ कछु मोसे ना रूठो॥
तुम ख़ुद अपने जियरा से पूँछो ॥
बीती कहाँ पे कल शाम
आयो कहाँ से …
आयो कहाँ से घनश्याम॥
रैना बिताई किस धाम ॥
हाय राम
आयो कहाँ से …
हाँ रात की जागी रे ॥
अँखियाँ हैं तोरी
रात की जागी रे अँखियाँ हैं तोरी
हो रही गली गली जिया की चोरी ॥
हो नहीं जाना बदनाम हाय राम
आयो कहाँ से …
सज धज तुमरी का कहूँ रसिया
धनिध ध
धनिध ध
मधप गपम रेमग
मगस निस निस निसगमग
सगम पनिगम
पनिस गमगसा निनिप मगस प
सज धज तुमरी का कहूँ रसिया
ऐसे लगे तेरे हाथों में बँसिया ॥
जैसे कटारी लियो थाम हाय राम ॥
आयो कहाँ से …
हाँ मैं ना कहूँ कछु मोसे ना रूठो॥
तुम ख़ुद अपने जियरा से पूँछो ॥
बीती कहाँ पे कल शाम
आयो कहाँ से …
Aayo Kahan Se Ghanshyam
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रात भर जागी वो कजरारी आंखें घनश्याम जी की, जैसे कोई रसिया रैन झेल रहा हो। गली-गली में दिल चुराने की चोरी चल रही हो, और सुबह होते ही वो सज-धज कर आ धमकें। बांसुरी हाथ में थामे हुए, जैसे कोई कटारी लिए हो प्रेम की। मोहक धुनें बजातीं जो मन को बेकाबू कर दें, रात कहां बिताई ये तो जिया खुद पूछे। इश्वर का आशर्वाद है जो ऐसी लीला रचता है, हर पल नया रंग भर देता है।
सखी पूछे तो मुस्कुरा दें वो, रूठना न पड़े बस इतना कह दें। कल शाम की बातें जिया में ही छुपी हों, रात की जागरण में खोई हुईं। बांसुरी की तान पर सब कुछ भूल जाएं, बस वो रूप देख लें तो मन भर आए। ये प्रेम की मस्ती हमें जोड़ लेती है उस दिव्य धाम से। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री घनश्याम जी।
सखी पूछे तो मुस्कुरा दें वो, रूठना न पड़े बस इतना कह दें। कल शाम की बातें जिया में ही छुपी हों, रात की जागरण में खोई हुईं। बांसुरी की तान पर सब कुछ भूल जाएं, बस वो रूप देख लें तो मन भर आए। ये प्रेम की मस्ती हमें जोड़ लेती है उस दिव्य धाम से। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री घनश्याम जी।
- बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
- अर्जी तो बहुत तेरे दरबार पड़ी होगी
- युद्ध को देदो हे माधव विश्राम
- सुनो हे साँवरिया सरकार तुम बिन विपदा
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Author - Saroj Jangir
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