ढोल वाले ढोल बजा कीर्ति ने लाली जाई
ढोल वाले ढोल बजा कीर्ति ने लाली जाई
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई,
कीर्ति ने लाली जाई, बरसाने में बजी बधाई॥
सज-धज कर सब सखियाँ आईं, गाने लगीं बधाई,
रुनक-झुनक सब सखियाँ नाचें, माँगें आज बधाई॥
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई॥
बरसाने के भाग जगे हैं, राधा प्यारी आई,
गली-गली में धूम मची है, नाचे नर-नारी समाई॥
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई॥
लाली तीन लोक से न्यारी, संतों को मन भाई,
ऐसा प्यारा दृश्य देखकर, रसिकों ने महिमा गाई॥
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई॥
माधव दास की क्या थी हस्ती? सब तूने ही बनाई,
संतों की कृपा के बल से, बधाई तुझ पर छाई॥
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई॥
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई,
कीर्ति ने लाली जाई, बरसाने में बजी बधाई॥
सज-धज कर सब सखियाँ आईं, गाने लगीं बधाई,
रुनक-झुनक सब सखियाँ नाचें, माँगें आज बधाई॥
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई॥
बरसाने के भाग जगे हैं, राधा प्यारी आई,
गली-गली में धूम मची है, नाचे नर-नारी समाई॥
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई॥
लाली तीन लोक से न्यारी, संतों को मन भाई,
ऐसा प्यारा दृश्य देखकर, रसिकों ने महिमा गाई॥
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई॥
माधव दास की क्या थी हस्ती? सब तूने ही बनाई,
संतों की कृपा के बल से, बधाई तुझ पर छाई॥
ढोल वाले ढोल बजा, कीर्ति ने लाली जाई॥
राधा अष्टमी स्पेशल भजन बधाई हो || ढोल वाले ढोल बजा कीरत ने लाली जाई || माधौ बिहारी दास || व्रज रस
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राधा रानी के जन्म या आगमन के उल्लासमय अवसर का चित्रण करता है, जब बरसाने में हर ओर खुशियाँ और उत्सव का माहौल है। ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ कीर्ति (राधा की माँ) अपनी लाली (राधा) को लेकर आई हैं, और पूरा बरसाना आनंद में झूम रहा है। सखियाँ सज-धजकर बधाई गा रही हैं, गलियों में नृत्य और उत्सव का रंग छाया है।
राधा के आगमन से बरसाने का भाग्य जाग उठा है—हर गली में उल्लास है, लोग-बाग नाच रहे हैं। राधा की लाली तीनों लोकों में सबसे न्यारी है, संतों के मन को भी भा जाती है, और रसिकजन इस दृश्य की महिमा गाते हैं। भजन का भाव यह है कि संतों की कृपा और राधा के प्रेम से साधारण व्यक्ति (जैसे माधौ दास) की भी महिमा बढ़ जाती है।
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श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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