मैनु रख चरना दे कॉल शिरडी वालियाँ
मैनु रख चरना दे कॉल शिरडी वालियाँ
मैनु रख चरना दे कॉल शिरडी वालियाँ,
मेरे पाप पुण्य न तोल शिरडी वालियाँ।
बख्श दे गुनाह मेरे, मैं भी बंदा तेरा है,
ज़िन्दगी मेरी वस तेरे, चंगा मंझा तेरा है।
खाता न कर्म डा खोल शिरडी वालियाँ,
मैनु रख चरना दे कॉल शिरडी वालियाँ।
तेरे वाजो दस मैनु दुःख कहिनु दसां मैं,
अपने नसीबा उते रोवा, कदे हसां मैं।
मन होया दहवा ढोल शिरडी वालियाँ,
मैनु रख चरना दे कॉल शिरडी वालियाँ।
तू है मेरा मोहन सैयां, तेरा है सुदामा मैं,
रखले वे गल मेरी वारि वारि जावा मैं।
चुप ना कर कुछ ते बोल शिरडी वालियाँ,
मेरे पाप पुण्य न तोल शिरडी वालियाँ,
मैनु रख चरना दे कॉल शिरडी वालियाँ।
मेरे पाप पुण्य न तोल शिरडी वालियाँ।
बख्श दे गुनाह मेरे, मैं भी बंदा तेरा है,
ज़िन्दगी मेरी वस तेरे, चंगा मंझा तेरा है।
खाता न कर्म डा खोल शिरडी वालियाँ,
मैनु रख चरना दे कॉल शिरडी वालियाँ।
तेरे वाजो दस मैनु दुःख कहिनु दसां मैं,
अपने नसीबा उते रोवा, कदे हसां मैं।
मन होया दहवा ढोल शिरडी वालियाँ,
मैनु रख चरना दे कॉल शिरडी वालियाँ।
तू है मेरा मोहन सैयां, तेरा है सुदामा मैं,
रखले वे गल मेरी वारि वारि जावा मैं।
चुप ना कर कुछ ते बोल शिरडी वालियाँ,
मेरे पाप पुण्य न तोल शिरडी वालियाँ,
मैनु रख चरना दे कॉल शिरडी वालियाँ।
Mainu Rakh Charna De Kol Sai Bhajan By Mohan Sharma [Full HD Song] I Sai Ka Sawali
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Sai Bhajan: Mainu Rakh Charna De Kol
Album Name: Sai Ka Sawali
Singer: Mohan Sharma
Music Director: Lovely Sharma
Lyricist: Ravi Chopra
Picuturised On: Mohan Sharma
Music Label: T-Series
Album Name: Sai Ka Sawali
Singer: Mohan Sharma
Music Director: Lovely Sharma
Lyricist: Ravi Chopra
Picuturised On: Mohan Sharma
Music Label: T-Series
जब मनुष्य अपने जीवन के बोझ, गलतियों और कमजोरियों के साथ किसी परम शक्ति की शरण में जाता है, तो उसके भीतर गहरा विनम्रता और आत्मसमर्पण का भाव जागता है। वह जानता है कि उसके कर्मों का लेखा-जोखा चाहे जैसा भी हो, लेकिन सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना और गुरु के चरणों में समर्पण उसे आंतरिक शांति और सुरक्षा का अनुभव कराते हैं। यह भावना केवल भय या पश्चाताप की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है कि जीवन के हर अच्छे-बुरे क्षण में कोई दयालु शक्ति उसे संभाले हुए है। जब व्यक्ति अपने दोष, दुख और सीमाओं को स्वीकार कर लेता है, तो उसके भीतर से बोझ हल्का हो जाता है और वह खुद को एक नई ऊर्जा और आश्वासन के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार पाता है।
जीवन की कठिनाइयों में, जब कोई भी अपना नहीं लगता या जब मन पूरी तरह निराश हो जाता है, तब केवल एक ही सहारा शेष रह जाता है—गुरु या ईश्वर के चरण। उस शरण में जाने से ही मनुष्य को सच्चा सुकून और संतुलन मिलता है। यह संबंध किसी शर्त या गणना पर आधारित नहीं होता, बल्कि पूर्ण समर्पण और प्रेम पर टिका होता है। जैसे सुदामा ने कृष्ण के आगे अपनी सच्चाई और गरीबी रख दी, वैसे ही जब भक्त अपने जीवन का हर सुख-दुख, पाप-पुण्य गुरु के चरणों में अर्पित कर देता है, तो उसे न केवल क्षमा और अपनापन मिलता है, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति भी प्राप्त होती है। यही वह संबंध है, जो हर परिस्थिति में मनुष्य को संभालता और संबल देता है।
जीवन की कठिनाइयों में, जब कोई भी अपना नहीं लगता या जब मन पूरी तरह निराश हो जाता है, तब केवल एक ही सहारा शेष रह जाता है—गुरु या ईश्वर के चरण। उस शरण में जाने से ही मनुष्य को सच्चा सुकून और संतुलन मिलता है। यह संबंध किसी शर्त या गणना पर आधारित नहीं होता, बल्कि पूर्ण समर्पण और प्रेम पर टिका होता है। जैसे सुदामा ने कृष्ण के आगे अपनी सच्चाई और गरीबी रख दी, वैसे ही जब भक्त अपने जीवन का हर सुख-दुख, पाप-पुण्य गुरु के चरणों में अर्पित कर देता है, तो उसे न केवल क्षमा और अपनापन मिलता है, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति भी प्राप्त होती है। यही वह संबंध है, जो हर परिस्थिति में मनुष्य को संभालता और संबल देता है।
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Author - Saroj Jangir
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