मोरी अँखियों की प्यास बुझा साई बाबा मेरे घर आ

मोरी अँखियों की प्यास बुझा साई बाबा मेरे घर आ

ओ मोरे अंगना के भाग जगा,
मोरी अँखियों की प्यास बुझा, साई बाबा मेरे घर आ।।

कब तक तुम्हरी राह निहारे, मेरे प्यासे नैना,
बिन दर्शन ये नैन बेचारे, कैसे पाए चैना,
अपनी प्यारी-प्यारी सूरत, मुझको दिखलाओ,
साई बाबा मेरे घर आओ।।

तुमसे मेरी आस है साई, तुम हो मेरा सपना,
इक तुम ही हो अपने मेरे, कोई नहीं है अपना,
उजड़ी हुई है मेरी कुटिया, इसको स्वर्ग बनाओ,
साई बाबा मेरे घर आओ।।

जपता रहता है मेरा मन, तुम्हारे नाम की माला,
कब तक अंधियारों में रहूँ मैं, दे दो मुझे उजाला,
ऐसे नहीं आते हो तो, फिर सपने में आ जाओ,
साई बाबा मेरे घर आओ।।


गुरुवार के दिन जिस घर में सुबह सुबह यह भजन सुना जाता है उस घर पर साई बाबा की असीम कृपा होती है #JMD

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About Bhajan -

➤Song Name: साई बाबा मेरे घर आओ 
➤Singer Name: Wasim Khan
 
साईं बाबा की कृपा और भक्त की पुकार का यह भाव हृदय को एक ऐसी तड़प और भक्ति से भर देता है, जो उसे सदा प्रभु की स्मृति में डुबो देता है। यह भजन उस अटल विश्वास को दर्शाता है कि साईं के आगमन से भक्त के आंगन का भाग्य जाग उठता है और उसकी आँखों की दर्शन की प्यास बुझ जाती है। साईं की प्यारी सूरत के बिना भक्त के नैन चैन नहीं पाते, और वह उनकी शरण में अपनी उजड़ी कुटिया को स्वर्ग बनाने की प्रार्थना करता है। साईं ही भक्त की एकमात्र आस और सपना हैं, जिनके बिना उसका कोई अपना नहीं। यह भक्ति भक्त को साईं के चरणों में समर्पित होने और उनके प्रेम में रंगने की प्रेरणा देती है। साईं के नाम की माला जपता भक्त अंधेरों से उजाले की ओर बढ़ने की कामना करता है, यह याचना करते हुए कि साईं कम से कम सपनों में ही आकर उसे दर्शन दें। साईं की कृपा भक्त के जीवन से हर अंधियारा मिटा देती है, और उनकी उपस्थिति उसके मन को शांति और आनंद से भर देती है।

Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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