भाव के भूखे है मेरे श्याम गिरधारी

भाव के भूखे है मेरे श्याम गिरधारी

भाव के भूखे हैं मेरे,
श्याम गिरधारी,
प्रेम के वश में सदा,
रहते हैं बनवारी,
करो जो तन-मन इन्हें अर्पण,
संवारेंगे प्रभु जीवन,
करो जो तन-मन इन्हें अर्पण,
संवारेंगे प्रभु जीवन।।

धन-दौलत किस काम की,
भक्ति ये भगवान की,
भक्ति में प्रभु देखते,
क्या नियत इंसान की,
मन में जो अभिमान हो,
कैसे प्रभु का ध्यान हो,
मोह-माया छोड़ी नहीं,
कैसे सत्य का ज्ञान हो,
बालक सा जब निष्कलंक होगा,
गंगाजल सा निर्मल होगा,
अरे बरसेगी प्रभु प्रेम की,
तब ही बरखा भाई,
प्रेम के वश में सदा,
रहते हैं बनवारी,
करो जो तन-मन इन्हें अर्पण,
संवारेंगे प्रभु जीवन,
करो जो तन-मन इन्हें अर्पण,
संवारेंगे प्रभु जीवन।।

जप-तप ना हो ना सही,
मन में प्रभु का ध्यान कर,
पाया है भगवान से,
सब कुछ, तो फिर दान कर,
दुखियों का दुख बांट ले,
संतों का सम्मान कर,
सब जीवों से प्रेम कर,
खुद से बड़ों का मान कर,
जैसा तू बीज लगाएगा,
वैसा ही फल तू पाएगा,
शुभ कर्मों से महकेगी,
जीवन की फुलवारी,
प्रेम के वश में सदा,
रहते हैं बनवारी,
करो जो तन-मन इन्हें अर्पण,
संवारेंगे प्रभु जीवन,
करो जो तन-मन इन्हें अर्पण,
संवारेंगे प्रभु जीवन।।

भाव के भूखे हैं मेरे,
श्याम गिरधारी,
प्रेम के वश में सदा,
रहते हैं बनवारी,
करो जो तन-मन इन्हें अर्पण,
संवारेंगे प्रभु जीवन,
करो जो तन-मन इन्हें अर्पण,
संवारेंगे प्रभु जीवन।।


Bhaav Ke Bhookhe Mere Shyam

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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