दरबार ये ना छूटे संकट हो या आराम

दरबार ये ना छूटे संकट हो या आराम

करता हूं एक विनती,
तुमसे ओ मेरे श्याम,
दरबार ये ना छूटे,
संकट हो या आराम।।

जब क्रोध में आऊ तो,
तुम शीतलता देना,
जब हो जाऊ मैं कठोर,
थोड़ी कोमलता देना,
ना आये अहम कभी,
प्रभु रखना थोड़ा ध्यान,
सेवा ये ना छूटे चाहे,
दुःख हो या आराम।।

जब पड़ जाऊं कमजोर,
प्रभु, हाथ पकड़ लेना,
अंधियारा हो घनघोर,
बाहों में जकड़ लेना,
ना चाहूं अधिक लेकिन,
दे पाऊं दीन को दान,
विश्वास ये ना टूटे,
चाहे दुःख हो या आराम।।

व्याकुल हो जाऊं तो,
तुम धीर बंधा देना,
सतपथ से भटक जाऊं,
तू राह दिखा देना,
मन में आये ना बैर,
हाथों से हों अच्छे काम,
रिश्ता ये ना टूटे,
चाहे दुःख हो या आराम।।

जब अंतकाल आये,
थोड़ी दया दिखा देना,
‘गोविन्द’ कहे मोहन सी,
एक झलक दिखा देना,
क्षण भर के दरश पाके,
हो जाएगा कल्याण,
दरबार ये ना छूटे,
चाहे दुःख हो या आराम।।

करता हूं एक विनती,
तुमसे ओ मेरे श्याम,
दरबार ये ना छूटे,
संकट हो या आराम।।


Kamna Siddhi Shyam Darbar Kirtan - February 2025 (Govind Damani) - Pehli Najar Mein Tera Kaam Banega

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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