तेरी इन मतवारी आँखों में डले काजल भजन

तेरी इन मतवारी आँखों में डले काजल के डोरे भजन


तेरी इन मतवारी आँखों में,
डले काजल के डोरे,
अरे घनश्याम।
मुखड़े पे चंदन की शोभा,
मन को भा गई मोरे,
अरे घनश्याम।।

मोर मुकुट सिर में साजे,
गाल में तिल प्यारा लागे,
आँख में काजल, होंठ में लाली,
भाग मुरलिया के जागे।
कानों में कुंडल की शोभा,
तन-मन को झकझोरे,
अरे घनश्याम।।

कंठ में वैजयंती माला,
कांधे पीतांबर डाले,
चक्र, सुदर्शन, हाथ मुरलिया,
पायल है घुंघरू वाला।
श्रृंगार तेरा प्यारा लागे,
अरे ओ ब्रज के छोरे,
सुनो घनश्याम।।

साथ में राधा रानी है,
जिसका न कोई सानी है,
श्याम है राधा का दीवाना,
राधा श्याम दीवानी है।
राधा रानी के चरणों में,
खड़े ‘राजेन्द्र’ कर जोरे,
अरे घनश्याम।।

तेरी इन मतवारी आँखों में,
डले काजल के डोरे,
अरे घनश्याम।
मुखड़े पे चंदन की शोभा,
मन को भा गई मोरे,
अरे घनश्याम।।


तेरी इन मतवारी आँखों में

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भगवान श्रीकृष्ण का रूप अत्यंत आकर्षक और मनमोहक है। उनकी मतवाली आँखों में काजल की रेखाएँ, मुख पर चंदन की शोभा, सिर पर मोर मुकुट, गाल पर तिल, और होंठों की लाली—इन सबका सौंदर्य मन को गहराई से छू जाता है। उनकी मुरली की धुन, कानों में झूलते कुंडल, गले में वैजयंती माला, कंधे पर पीतांबर, और पैरों में घुंघरू वाली पायल—यह सम्पूर्ण श्रृंगार उनके दिव्य व्यक्तित्व को और भी अनुपम बना देता है। श्रीकृष्ण का यह रूप न केवल बाहरी सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि उनके भीतर छिपे प्रेम, करुणा और माधुर्य की झलक भी देता है।

श्रीकृष्ण, ब्रज के नटवर नागर, प्रेम और भक्ति के सर्वोच्च आदर्श हैं। उनका जीवन राधा के प्रेम में रंगा है, जहाँ दोनों की भक्ति और समर्पण एक-दूसरे के लिए अनुपम मिसाल है। श्रीकृष्ण का प्रत्येक अंग, प्रत्येक आभूषण, उनके दिव्य स्वरूप और लीलाओं की याद दिलाता है। वे केवल एक देवता नहीं, बल्कि प्रेम, सौंदर्य और माधुर्य के साक्षात स्वरूप हैं। राधा के चरणों में खड़े होकर, हर भक्त स्वयं को धन्य मानता है, क्योंकि श्रीकृष्ण का सान्निध्य आत्मा को शांति, प्रेम और आनंद से भर देता है।

गीतकार -राजेंद्र प्रसाद सोनी
गायक-- राजेंद्र प्रसाद सोनी
बोल- तेरी इन मतवारी आंखों में

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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