घर आया मेरा नंदलाला मोर मुकुट बंसी वाला
घर आया मेरा नंदलाला मोर मुकुट बंसी वाला
घर आया मेरा नंदलाला,
मोर मुकुट बंसी वाला।
घर आया मेरा...
देवकी के तुम जाए हो,
यशोदा गोद खिलाए हो।
नंद कहे मेरा नंदलाला,
मोर मुकुट बंसी वाला।
घर आया मेरा...
यमुना तट पर जाते हो,
सखियों के चीर चुराते हो।
सखियां कहे मेरा गोपाला,
मोर मुकुट बंसी वाला।
घर आया मेरा...
मीरा बाई अरज़ करे,
प्रभु चरणों में ध्यान धरे।
अमृत कर दिया विष प्याला,
मोर मुकुट बंसी वाला।
घर आया मेरा...
सभा में द्रोपदी फरियाद करे,
रो रो के वो याद करे।
चीर बढ़ा दिया नंदलाला,
मोर मुकुट बंसी वाला।
घर आया मेरा...
मोर मुकुट बंसी वाला।
घर आया मेरा...
देवकी के तुम जाए हो,
यशोदा गोद खिलाए हो।
नंद कहे मेरा नंदलाला,
मोर मुकुट बंसी वाला।
घर आया मेरा...
यमुना तट पर जाते हो,
सखियों के चीर चुराते हो।
सखियां कहे मेरा गोपाला,
मोर मुकुट बंसी वाला।
घर आया मेरा...
मीरा बाई अरज़ करे,
प्रभु चरणों में ध्यान धरे।
अमृत कर दिया विष प्याला,
मोर मुकुट बंसी वाला।
घर आया मेरा...
सभा में द्रोपदी फरियाद करे,
रो रो के वो याद करे।
चीर बढ़ा दिया नंदलाला,
मोर मुकुट बंसी वाला।
घर आया मेरा...
घर आया मेरा नंदलाला Ghar aaya Mera nandlala Jai shri Krishna
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कृष्ण के आगमन से घर, जीवन और हृदय में उल्लास और आनंद की लहर दौड़ जाती है। मोर मुकुट, बंसी वाले नंदलाला के लौट आने से हर ओर प्रेम और उत्सव का वातावरण बन जाता है। कृष्ण का जन्म देवकी के घर हुआ, लेकिन यशोदा की गोद में उन्होंने बाललीलाएँ कीं, जिससे दोनों ही माताओं का वात्सल्य धन्य हो गया। नंद बाबा के लिए उनका नंदलाला सबसे प्यारा है, जो पूरे गोकुल का आनंद है। कृष्ण की बाल लीलाएँ यमुना तट पर सखियों के साथ खेलते हुए, उनकी चंचलता और शरारतों में प्रकट होती हैं। सखियों के चीर चुराकर वे प्रेम और भक्ति की नई परिभाषा गढ़ते हैं, और सखियों के लिए वे सच्चे गोपाला हैं।
मीरा जैसी सच्ची भक्तिन के जीवन में कृष्ण का नाम ही सबसे बड़ा सहारा बन जाता है। मीरा के विष के प्याले को अमृत में बदल देना, कृष्ण की कृपा और अपने भक्तों के प्रति उनकी करुणा का प्रमाण है।
द्रौपदी की पुकार पर कृष्ण ने सभा में उसकी लाज बचाई, चीर बढ़ा दिया और उसे अपमान से बचा लिया। हर युग में, हर भक्त के लिए कृष्ण संकट के समय सहारा बनते हैं, उनकी रक्षा करते हैं और उन्हें अपने प्रेम में समेट लेते हैं।
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श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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द्रौपदी की पुकार पर कृष्ण ने सभा में उसकी लाज बचाई, चीर बढ़ा दिया और उसे अपमान से बचा लिया। हर युग में, हर भक्त के लिए कृष्ण संकट के समय सहारा बनते हैं, उनकी रक्षा करते हैं और उन्हें अपने प्रेम में समेट लेते हैं।
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Author - Saroj Jangir
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