जब याद तुम्हारी आती है कृष्णा भजन
जब याद तुम्हारी आती है कृष्णा भजन
जब याद तुम्हारी आती है, मैं तेरे दर पर आता हूँ। (दो बार)
अपने सुख-दुख को हे ठाकुर, मैं रो-रो कर तुम्हें सुनाता हूँ।
जब याद तुम्हारी आती है, मैं तेरे दर पर आता हूँ। (दो बार)
तुम मेरे हो, मैं तेरा हूँ, बस और नहीं कुछ याद मुझे। (दो बार)
यह ध्यान सदा मेरे मन में रहे, यह विनय सुनाने आया हूँ।
जब याद तुम्हारी आती है, मैं तेरे दर पर आता हूँ। (दो बार)
फूलों में तुम्हारी खुशबू है, पत्तों में तुम्हारी हस्ती है। (दो बार)
पर फूल नहीं है पास मेरे, बस नैन चढ़ाने आया हूँ।
जब याद तुम्हारी आती है, मैं तेरे दर पर आता हूँ। (दो बार)
तुम मेरे प्यारे सांवरिया, मेरा तुमसे हमेशा नाता है। (दो बार)
नहीं और मेरी कोई सुनता है, मैं तुम्हें सुनाने आया हूँ।
जब याद तुम्हारी आती है, मैं तेरे दर पर आता हूँ। (दो बार)
अपने सुख-दुख को हे ठाकुर, मैं रो-रो कर तुम्हें सुनाता हूँ। (दो बार)
अपने सुख-दुख को हे ठाकुर, मैं रो-रो कर तुम्हें सुनाता हूँ।
जब याद तुम्हारी आती है, मैं तेरे दर पर आता हूँ। (दो बार)
तुम मेरे हो, मैं तेरा हूँ, बस और नहीं कुछ याद मुझे। (दो बार)
यह ध्यान सदा मेरे मन में रहे, यह विनय सुनाने आया हूँ।
जब याद तुम्हारी आती है, मैं तेरे दर पर आता हूँ। (दो बार)
फूलों में तुम्हारी खुशबू है, पत्तों में तुम्हारी हस्ती है। (दो बार)
पर फूल नहीं है पास मेरे, बस नैन चढ़ाने आया हूँ।
जब याद तुम्हारी आती है, मैं तेरे दर पर आता हूँ। (दो बार)
तुम मेरे प्यारे सांवरिया, मेरा तुमसे हमेशा नाता है। (दो बार)
नहीं और मेरी कोई सुनता है, मैं तुम्हें सुनाने आया हूँ।
जब याद तुम्हारी आती है, मैं तेरे दर पर आता हूँ। (दो बार)
अपने सुख-दुख को हे ठाकुर, मैं रो-रो कर तुम्हें सुनाता हूँ। (दो बार)
जब याद तुम्हारी आती है | Heart Touching Krishna Bhajan 2020 | Devi Chitralekhaji
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यह भजन आत्मीयता, तड़प और पूर्ण समर्पण की भावना से भरा है। जब भी मन में कृष्ण की याद आती है, भक्त अपने सुख-दुख लेकर उनके दर पर चला आता है, और रो-रोकर अपने मन की बात उन्हें सुनाता है। उसके लिए कृष्ण ही सबकुछ हैं—वह खुद को उनका मानता है और यही भाव सदा मन में बना रहे, यही विनती करता है। भक्त को फूलों में कृष्ण की खुशबू और पत्तों में उनकी उपस्थिति महसूस होती है, लेकिन जब पास फूल नहीं होते, तो वह अपने दो नयन ही अर्पण करने चला आता है। उसके लिए कृष्ण से नाता सबसे गहरा है—कोई और उसकी सुनता नहीं, इसलिए वह अपने मन की बात सिर्फ अपने प्यारे सांवरिया को ही सुनाने आता है।
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Author - Saroj Jangir
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