चले जा रहे हैं हम किनारे किनारे भजन
चले जा रहे हैं हम किनारे किनारे भजन
चले जा रहे हैं, चले जा रहे हैं,
चले जा रहे हैं हम किनारे-किनारे,
जीवन है राधा रानी, तेरे सहारे।।
कृपा तेरी देखी जो बरसाने आकर,
सब कुछ मिला श्यामा, तेरे दर आकर,
तुम्हारे सिवा न कोई साथ हमारे,
चले जा रहे हैं किनारे-किनारे,
जीवन है राधा रानी, तेरे सहारे।।
कर दो कृपा अब तो बरसाने वाली,
सेवा कुञ्ज वाली, सुध लो हमारी,
गुज़रेगा जीवन ब्रज में तुम्हारे,
चले जा रहे हैं किनारे-किनारे,
जीवन है राधा रानी, तेरे सहारे।।
राधा रस, प्रीत तुम्हारी अगाधा,
रटते रहो प्यारे — राधा, राधा, राधा,
गुज़ारा नहीं है इनके बिना रे, बिना रे,
चले जा रहे हैं किनारे-किनारे,
जीवन है राधा रानी, तेरे सहारे।।
चले जा रहे हैं हम किनारे-किनारे,
जीवन है राधा रानी, तेरे सहारे।।
कृपा तेरी देखी जो बरसाने आकर,
सब कुछ मिला श्यामा, तेरे दर आकर,
तुम्हारे सिवा न कोई साथ हमारे,
चले जा रहे हैं किनारे-किनारे,
जीवन है राधा रानी, तेरे सहारे।।
कर दो कृपा अब तो बरसाने वाली,
सेवा कुञ्ज वाली, सुध लो हमारी,
गुज़रेगा जीवन ब्रज में तुम्हारे,
चले जा रहे हैं किनारे-किनारे,
जीवन है राधा रानी, तेरे सहारे।।
राधा रस, प्रीत तुम्हारी अगाधा,
रटते रहो प्यारे — राधा, राधा, राधा,
गुज़ारा नहीं है इनके बिना रे, बिना रे,
चले जा रहे हैं किनारे-किनारे,
जीवन है राधा रानी, तेरे सहारे।।
Jeevan Hai Radha Rani - जीवन है राधा रानी तेरे सहारे - Manish Bodwani (7666620276)
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Bhajan Sandhya By Manish Bodwani at Sai Lakh Jeevan Ghot Gaushala Ulhasnagar-5.
जीवन को जब राधा रानी के सहारे चलने का अहसास आता है, तो लगता है मानो यह सारा रास्ता उन्हीं की छाया में बिछा है। जहां कहीं भी चले, किनारे‑किनारे ही चलें, लेकिन उनके बिना यह चलना अधूरा लगता है। जिस भक्त ने बरसाने वाली राधा की कृपा देख ली, उसके घर में कुछ भी खोटा नहीं रहता – सब कुछ रंग‑रूप, प्रेम और सम्मान भर जाता है। जय श्री राधे जी।सेवा कुंजवाली राधा की झलक से ही जीवन ब्रज में उतर आता है, जहां न दुख की थकान, न भय की आवाज़। उनकी कृपा हो तो सारे दिन ऊजले बन जाते हैं, मन उनके रस में डूबा रहता है। “राधा, राधा, राधा” – यही जपना इतनी गहरी लगन बन जाता है कि बिना उनके तो जीवन का यह पल भी गुज़ारा नहीं समझा जाता। इश्वर का आशर्वाद हम सब पर बना रहे, यही राधा रस दिल को हमेशा रंगा रहे। जय श्री राधे जी।
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Author - Saroj Jangir
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