कहाँ हाथ पकड़ोगे दुनिया का बाबा तुकडोजी महाराज

कहाँ हाथ पकड़ोगे दुनिया का बाबा तुकडोजी महाराज

कहां हाथ पकड़ोगे,
दुनिया का बाबा,
जीने में भी तौबा और,
मरने में भी तौबा।।

ज़रा कुछ भी बोलो तो,
पागल कहेंगे,
कुछ ना कहो तो भी,
लूटे चलेंगे,
दोनों तरफ से भी
होती है शोभा,
कहां हाथ पकड़ोगे,
दुनिया का बाबा,
जीने में भी तौबा और,
मरने में भी तौबा।।

पहनी हो माला तो,
बोलेंगे ढोंगी,
खाली रहो तो वो
होता है भोगी,
सच्चे रहो तो वे
कर देंगे लंबा,
कहां हाथ पकड़ोगे,
दुनिया का बाबा,
जीने में भी तौबा और,
मरने में भी तौबा।।

गाड़ी को जाता,
चलती को गाड़ी,
निर्भय को शेरजोर,
सीधा अनाड़ी,
सतियों को पागल,
जारण को रंभा,
कहां हाथ पकड़ोगे,
दुनिया का बाबा,
जीने में भी तौबा और,
मरने में भी तौबा।।

ऐसे ज़माने को
किसने बनाया,
मुझको है लगता
यहीं पर है माया,
‘तुकड़्या’ कहे उसको
तीरथ ना काबा,
कहां हाथ पकड़ोगे,
दुनिया का बाबा,
जीने में भी तौबा और,
मरने में भी तौबा।।

कहां हाथ पकड़ोगे,
दुनिया का बाबा,
जीने में भी तौबा और,
मरने में भी तौबा।।


Rashtrasant Tukdoji Maharaj-कहाँ हाथ पकडोंगे दुनिया का बाबा, जीने में भी तोबा और मरने में भी तोबा॥

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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